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“राम का अर्थ है राष्ट्र का मंगल”- जबलपुर में चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ, सीएम मोहन यादव ने किया उद्घाटन

नस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ श्रद्धा, संस्कृति और शोध के भव्य संगम के साथ हुआ। सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की गरिमामयी उपस्थिति में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया।

Jabalpur News: मानस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ श्रद्धा, संस्कृति और शोध के भव्य संगम के साथ हुआ। सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की गरिमामयी उपस्थिति में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया।

रामायण भारतीय जीवन मूल्यों की आत्मा : मुख्यमंत्री

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रामायण भारतीय जीवन मूल्यों की आत्मा है, जो आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राम केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण का आधार हैं।

Jabalpur News:  राम का अर्थ राष्ट्र का मंगल : स्वामी रामभद्राचार्य

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि “राम का अर्थ है राष्ट्र का मंगल।” उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री और मुख्यमंत्री से रामचरितमानस को राष्ट्र ग्रंथ घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रामायण मानवता, मर्यादा और समरसता का वैश्विक संदेश देती है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री सहित कई गणमान्य रहे उपस्थित

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शाश्वत अतिथि के रूप में तथा लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने भी अपने विचार रखे। आयोजन अध्यक्ष अजय बिश्नोई ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की अवधारणा और वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला।

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Jabalpur News: विदेशी विद्वानों और कलाकारों की सहभागिता

सम्मेलन में चीन से पधारी जोया जेंग ने ज्ञानेश्वरी दीदी को चाइनीज गीता भेंट की, वहीं इंडोनेशिया से आए प्रतिनिधियों ने इंडोनेशिया रामायण संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी को भेंट की। श्रीलंका, नेपाल और अन्य देशों से आए विद्वानों ने भी रामायण से जुड़े विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए।

कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

रात्रि सत्र में “कवि कोविद कहि सके कहां ते” कार्यक्रम के अंतर्गत कवि सुदीप भोला एवं रामायण द्विवेदी (अयोध्या) की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद श्रीलंका के डान डिनेश कुमार द्वारा रावण के संगीत वाद्य यंत्रों का वादन और पटना की नाटक मंडली द्वारा भरत चरित्र पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने भाव-विभोर कर दिया।

Jabalpur News: शोध सत्रों और शब्द कीर्तन से हुआ दिन का आरंभ

प्रातः सत्र की शुरुआत शब्द कीर्तन से हुई, जिसे कुलजीत सिंह एवं उनकी टीम ने प्रस्तुत किया। इसके पश्चात “राम कथा: प्राचीन ज्ञान से वैश्विक दृष्टिकोण तक” विषय पर श्रीलंका के बाला राव, प्रोफेसर नीना उपाध्याय एवं सुखदेव सिंह मिन्हास ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

पुस्तक विमोचन और दुर्लभ प्रदर्शनी बनी आकर्षण

दोपहर में यायावर विचार जी की पुस्तक “जहँ जहँ राम चरण चलि जाहि” का विमोचन किया गया। ओडिशा के प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट गोपाल चरण सामल द्वारा रेत पर निर्मित राम मंदिर विशेष आकर्षण रहा। वहीं जबलपुर के सतीश श्रीवास्तव द्वारा 25 देशों के राम एवं रामायण विषयक डाक टिकटों का दुर्लभ संग्रह भी प्रदर्शित किया गया। श्याम नारायण तिवारी द्वारा राम मंदिर से संबंधित अखबारों का संग्रह और श्रीलंका की प्राचीन देगाल्डरुआ कला शैली में बनी हनुमान चालीसा पेंटिंग्स दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

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