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1000 साल पुराना चमत्कारी धाम: बीहड़ों में विराजती जालौन वाली माता की अद्भुत शक्ति

जालौन माता मंदिर उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध सिद्धपीठ है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां तपस्या की थी। बीहड़ों और यमुना तट के बीच बसा यह धाम आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।
हजारों साल पुरानी आस्था की अमिट गाथा

Jalaun Mata Mandir: देश और दुनिया में मां शक्ति के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। इन्हीं में से एक खास और प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्थित है। यमुना नदी के किनारे, घने जंगलों और बीहड़ों के बीच बना यह मंदिर ‘जालौन वाली माता का मंदिर’ के नाम से जाना जाता है। यह एक सिद्धपीठ माना जाता है और यहां की भक्ति और इतिहास दोनों ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

हजार साल पुराना दिव्य इतिहास

जानकारी के मुताबिक यह मंदिर लगभग एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। यहां विराजमान देवी को मां जालौन वाली कहा जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में पांडव अपने अज्ञातवास के समय यहां आए थे। कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। पांडवों ने यहां कुछ समय बिताया और तपस्या भी की। मंदिर की एक खास बात यह है कि इसकी प्रतिमा पूर्व दिशा की ओर है, जिससे सुबह की पहली सूर्य किरण सीधे मां के चरणों पर पड़ती है।

Jalaun Mata Mandir: बुंदेलखंड की गौरवशाली पावन धरोहर

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार यह मंदिर बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को मन की शांति का अनुभव होता है। भक्त मानते हैं कि मां की छत्रछाया में उन्हें सुरक्षा और सुकून मिलता है। मंदिर की सुंदर बनावट और पुरानी परंपराएं लोगों को बहुत प्रभावित करती हैं। मां का स्वरूप कष्ट दूर करने और मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना जाता है। उनके दिव्य श्रृंगार के दर्शन से श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था जागती है।

बीहड़ों में गूंजती आस्था

एक समय ऐसा भी था जब यह इलाका चंबल के डकैतों के कारण बदनाम था। डकैतों के डर से आम लोग यहां आने से घबराते थे। फूलन देवी, फक्कड़ और मलखान सिंह जैसे कई प्रसिद्ध डकैत भी यहां आकर मां के दर्शन करते थे। हालांकि, डकैत कभी भी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशान नहीं करते थे। आजादी के बाद भी लंबे समय तक डकैतों के डर से यह मंदिर काफी सुनसान रहा। लेकिन पिछले लगभग 30 वर्षों में पुलिस की कार्रवाई और एनकाउंटर के बाद डकैतों का खात्मा हुआ और अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज नवरात्रि के समय दूर-दूर से हजारों लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीहड़ों के बीच स्थित इस मंदिर में आते हैं।

अटूट आस्था और मनोकामना पूर्ण धाम

भक्तों का विश्वास है कि मां जालौन वाली सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर सुनती हैं और हर मनोकामना पूरी करती हैं। यहां दर्शन करने के बाद लोग अपने जीवन में संतोष और समृद्धि महसूस करते हैं। यह मंदिर लोगों को आंतरिक शांति, विश्वास और मां की कृपा का अनुभव कराता है।

अगर आप यहां जाना चाहते हैं, तो जालौन जिले का मुख्य शहर ओराई सबसे नजदीक है। यह मंदिर ओराई से लगभग 20 से 30 किलोमीटर की दूरी पर बीहड़ क्षेत्र में स्थित है। यहां तक स्थानीय साधनों से पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग से सरल यात्रा सुविधा

रेल से जाने वालों के लिए ओराई रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी बड़ा स्टेशन है। यह उत्तर मध्य रेलवे लाइन पर स्थित है। झांसी, कानपुर और दिल्ली जैसे शहरों से यहां के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं। ओराई स्टेशन शहर के मुख्य इलाके से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से टैक्सी, ऑटो या बस लेकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग से भी ओराई अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कानपुर, झांसी और आगरा से बस और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है। दिल्ली और लखनऊ से भी सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। ओराई पहुंचने के बाद स्थानीय बस या निजी वाहन से मंदिर तक जाया जा सकता है।

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