Jalaun News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जहां अवैध खनन के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती रही है, वहीं जालौन जिले के हिमनपुरा खंड संख्या-1 में कथित रूप से चल रहा अवैध खनन प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि यहां अवैध खनन केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसानों की जमीन, पर्यावरण और नदी के अस्तित्व पर सीधा हमला बन चुका है।
किसानों के खेतों में दिन-रात की जा रही खुदाई
ग्रामीणों का कहना है कि पोकलैंड मशीनों के जरिए दिन-रात किसानों के खेतों में खुदाई की जा रही है। खेतों में बने गहरे गड्ढे केवल जमीन को ही नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यह सब कुछ उनकी आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
Jalaun News: NGT के आदेशों की उड़ रही धज्जियां?
स्थानीय लोगों का दावा है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद हिमनपुरा खंड-1 में अवैध खनन जारी है। आरोप है कि पट्टा धारक अंकित गुप्ता द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए भारी मशीनरी से खनन कराया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार नदी क्षेत्र में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो NGT के आदेश इस क्षेत्र में पहुंचते ही प्रभावहीन हो जाते हों।
रात होते ही तेज हो जाता है खनन
ग्रामीणों के अनुसार, जैसे ही अंधेरा होता है, हिमनपुरा क्षेत्र में खनन गतिविधियां और तेज हो जाती हैं। ट्रकों और पोकलैंड मशीनों की आवाज रातभर सुनाई देती है। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय कानून की मौजूदगी न के बराबर रहती है, जिससे यह संदेह और गहरा जाता है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक संरक्षण तो नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस कथित अवैध खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। तेज कटान से नदी के किनारे ढह रहे हैं, भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है और जल-जीवों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। NGT पहले ही ऐसे खनन को भविष्य में इकोलॉजिकल डिजास्टर की वजह बता चुका है।
Jalaun News: योगी सरकार की छवि पर असर?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में हिमनपुरा खंड-1 का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला न केवल प्रशासनिक विफलता बल्कि सरकार की सख्त कानून व्यवस्था की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सवाल
जब नियम स्पष्ट हैं, नुकसान सामने है और ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं, तो प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह लापरवाही है, अनदेखी है या किसी दबाव का परिणाम—यह जांच का विषय है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि हिमनपुरा खंड-1 में चल रहे कथित अवैध खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों की जमीन, नदी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
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