Jammu kashmir: संविधान और जम्मू-कश्मीर से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा सचिवालय ने तीन अहम विधेयकों पर विचार के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जॉइंट कमेटी) का गठन किया है, जो इन विधेयकों के सामाजिक, प्रशासनिक और संवैधानिक प्रभावों की गहन समीक्षा करेगी।
इन तीन विधेयकों पर होगी विस्तार से चर्चा
संयुक्त संसदीय समिति निम्नलिखित विधेयकों पर विचार कर रही है- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 ,जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 ,केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 और इन विधेयकों को संसद में बिल संख्या 111, 112 और 113 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
Jammu kashmir: अपराजिता सारंगी कर रहीं हैं समिति की अध्यक्षता
इस जॉइंट कमेटी की अध्यक्षता सांसद अपराजिता सारंगी कर रही हैं। समिति का मानना है कि इन विधेयकों का सीधा असर आम नागरिकों और शासन व्यवस्था पर पड़ेगा, इसलिए केवल संसदीय बहस तक सीमित रहने के बजाय जनता से भी राय लेना जरूरी है।
एनजीओ, विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स से मांगी गई राय
समिति ने आम जनता के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), नीति विशेषज्ञों, विभिन्न क्षेत्रों के स्टेकहोल्डर्स और संबंधित संस्थानों से लिखित सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
Jammu kashmir: कैसे और कब भेज सकते हैं सुझाव
जो भी व्यक्ति या संस्था इन विधेयकों पर अपनी राय देना चाहते हैं, वे विज्ञापन प्रकाशित होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित मेमोरेंडम भेज सकते हैं।मेमोरेंडम हिंदी या अंग्रेजी में हो सकता है,और दो प्रतियां भेजना अनिवार्य है। इसको भेजने का पता यह है ।
मेमोरेंडम भेजने का पता और संपर्क
पता: एडिशनल सेक्रेटरी (DR),
लोक सभा सचिवालय,
कमरा नंबर 018,
पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी,
नई दिल्ली – 110001 फोन: 23035743, 23034335
ईमेल: ई-मेल के माध्यम से भी मेमोरेंडम भेजा जा सकता है
विधेयकों का पूरा टेक्स्ट कहां उपलब्ध
इन तीनों विधेयकों का पूरा विवरण संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बिल नंबर 111, 112 और 113 के तहत सूचीबद्ध है। कमेटी को भेजे गए सभी मेमोरेंडम आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा होंगे। इन्हें पूरी तरह गोपनीय (Confidential) माना जाएगा और संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त होंगे, जिससे सुझाव देने वालों की पहचान और विचार सुरक्षित रहेंगे।
Jammu kashmir: व्यक्तिगत रूप से पेश होने का भी विकल्प
जो लोग केवल लिखित सुझाव नहीं, बल्कि कमेटी के सामने व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखना चाहते हैं, वे यह इच्छा अपने मेमोरेंडम में स्पष्ट रूप से दर्ज कर सकते हैं। हालांकि, किसे प्रस्तुति का अवसर दिया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय समिति के विवेक पर निर्भर करेगा।
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