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पश्चिम बंगाल: मुर्शिदाबाद में पत्रकार अभिषेक शांडिल्य के साथ धक्का-मुक्की, कैमरा तोड़ा गया

मुर्शिदाबाद में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार अभिषेक शांडिल्य पर हमला, कैमरा तोड़ा, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल...
Journalist Attack

Journalist Attack: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्लोबल भारत टीवी के पत्रकार अभिषेक शांडिल्य के साथ रिपोर्टिंग के दौरान कथित तौर पर धक्का-मुक्की, बदसलूकी और उपकरणों की तोड़फोड़ की गई। यह घटना उस समय हुई जब वे मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की नींव वाले स्थान पर जमीनी हकीकत दिखाने पहुंचे थे।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान बिगड़ा माहौल

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, जैसे ही अभिषेक शांडिल्य ने मौके पर सवाल पूछने शुरू किए, वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। आरोप है कि देखते ही देखते विरोध उग्र हो गया, पत्रकार के हाथ से माइक और कैमरा छीन लिया गया और कैमरे को सरेआम तोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि अभिषेक शांडिल्य हाल के दिनों में राज्य में कथित घुसपैठ और उससे जुड़े मुद्दों पर लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे।

Journalist Attack
                               अटैक करने वालों में से एक की तस्वीर कैमरा में कैद

Journalist Attack: पुलिस की भूमिका पर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि घटना के दौरान जब पत्रकार ने मदद के लिए पुलिस को बुलाया, तो हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने पीड़ित पत्रकार को ही अपनी गाड़ी में बैठाकर वहां से हटा दिया। इस कथित कार्रवाई ने पुलिस की निष्पक्षता और प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संवेदनशील माहौल और बढ़ती चिंता

गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद में हाल के दिनों में धार्मिक स्थलों और आयोजनों को लेकर माहौल संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे समय में पत्रकारों पर हमला होना न सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता की ओर/or संकेत करता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या राज्य में संविधान से ज़्यादा भीड़ का डर हावी हो गया है।

Journalist Attack: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल ज़ोर पकड़ रहा है कि क्या बंगाल में सच दिखाना अपराध बनता जा रहा है? सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की भूमिका और राज्य सरकार की चुप्पी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय एजेंसियों के हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

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