Khamenei: वैश्विक राजनीति और धार्मिक पहचान के टकराव का असर भारत में भी दिखने लगा है। ईरान पर हुए सैन्य हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत की खबर के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। खासकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिया समुदाय के लोगों का हुजूम सड़कों पर नजर आया। लखनऊ के ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा और बड़ा इमामबाड़ा के आसपास बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग एकत्र हुए। लोगों के हाथों में खामनेई की तस्वीरें थीं और माहौल मातम व विरोध से भरा हुआ था।
क्या है लखनऊ और खामनेई के बीच संबंध?
इन घटनाओं के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर लखनऊ और ईरान के सुप्रीम लीडर के बीच ऐसा क्या संबंध है, जिसके चलते यहां इतना भावनात्मक माहौल बना। इस मुद्दे पर लखनऊ के शिया धर्मगुरु और अखिल भारतीय शिया निजी कानून बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद मिर्ज़ा यासूब अब्बास ने विस्तृत बातचीत में कहा कि यह पूरी तरह धार्मिक जुड़ाव का मामला है। उनका कहना है कि ईरान और लखनऊ के बीच कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संबंध नहीं है, बल्कि यह आस्था का रिश्ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे वेटिकन में पोप को दुनिया भर के ईसाई मानते हैं या भारत में शंकराचार्य के अनुयायी विश्वभर में हैं, उसी तरह शिया समुदाय के लिए ईरान के सुप्रीम लीडर एक सर्वोच्च धार्मिक मार्गदर्शक होते हैं, जिनके मानने वाले पूरी दुनिया में फैले हैं।
मौलाना अब्बास ने कहा कि खामनेई इस्लामिक स्पिरिचुअल लीडर थे और वे इस्लाम की शिक्षाओं के अनुरूप बातें करते थे। उनके मुताबिक, कई सुन्नी धर्मगुरुओं ने भी इस घटना पर विरोध जताया है। उनका दावा है कि भारत समेत कई देशों के मुसलमान ईरान के क़ुम शहर में जाकर धार्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं।
Khamenei: शिया छात्रों के लिए ईरान में विशेष धार्मिक विश्वविद्यालय
मौलाना अब्बास के अनुसार, ईरान में शिया समुदाय के लिए विशेष धार्मिक विश्वविद्यालय हैं, जहां भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर से छात्र शिक्षा लेने जाते हैं। वहां धार्मिक अध्ययन के साथ–साथ ईरान की शासन व्यवस्था और नेतृत्व से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय शिया मौलवी और मौलाना वहीं से शिक्षा प्राप्त करते हैं, इसलिए ईरान को शिया समुदाय एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में देखता है। खामनेई से जुड़े विषयों पर भी वहां अलग से अध्ययन कराया जाता है।
आपको बता दें कि खामनेई की मौत की खबर के बाद देश के अलग–अलग हिस्सों से विरोध और शोक सभाओं की तस्वीरें सामने आ रही हैं। लखनऊ में उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि यह मामला सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
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