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लखीमपुर में यूरिया संकट के बीच बसतौली समिति पर हाई-वोल्टेज ड्रामा, किसान और कर्मचारियों के बीच नोकझोंक

Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के बिजुआ ब्लॉक अंतर्गत आने वाली साधन सहकारी समिति बसतौली में आज यूरिया वितरण को लेकर जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया। खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों का धैर्य उस समय जवाब दे गया जब वितरण प्रक्रिया के दौरान अव्यवस्था फैल गई। मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब समिति के कर्मचारियों ने एक किसान पर गोदाम से जबरन यूरिया की बोरी उठाने का गंभीर आरोप लगाया। घंटों चले इस हंगामे के कारण समिति पर कामकाज ठप रहा और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

खाद की किल्लत और किसानों का आक्रोश

वर्तमान में फसलों में यूरिया की भारी मांग है, जिसके चलते सरकारी समितियों पर किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। बसतौली समिति पर भी सुबह से ही सैकड़ों किसान खाद के लिए जमा थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यूरिया का स्टॉक कम होने और वितरण की गति धीमी होने के कारण किसान आक्रोशित थे। किसानों का आरोप है कि उन्हें घंटों इंतजार कराया जा रहा है, जबकि खाद की कालाबाजारी की आशंका बनी रहती है।

Lakhimpur Kheri: गोदाम में ‘जबरन’ प्रवेश और कर्मचारियों के आरोप

हंगामे के दौरान समिति कर्मचारियों ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि भीड़ का फायदा उठाकर एक किसान गोदाम के भीतर घुस गया और उसने जबरन यूरिया की बोरी उठाने की कोशिश की। कर्मचारियों का कहना है कि जब उसे रोकने का प्रयास किया गया, तो उसने बदतमीजी की और सरकारी कार्य में बाधा डाली। वहीं, दूसरी ओर किसानों का पक्ष है कि कर्मचारी चहेतों को खाद दे रहे हैं और आम किसान लाइन में खड़ा रह जाता है। इसी गहमागहमी के बीच एक किसान ने अपना हक मांगते हुए खाद की बोरी उठाई, जिसे कर्मचारियों ने ‘लूट’ और ‘जबरन’ उठाने का नाम दे दिया।

समिति पर ठप हुआ कामकाज

इस विवाद के बाद समिति के कर्मचारियों ने वितरण कार्य रोक दिया, जिससे कतार में खड़े अन्य किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मौके पर मौजूद किसानों ने समिति के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सहकारिता विभाग के अधिकारी भी सक्रिय हुए। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और दोनों पक्षों को शांत कराया। बसतौली समिति पर हुए इस हंगामे ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर खाद का पर्याप्त स्टॉक है, तो वितरण में पारदर्शिता क्यों नहीं अपनाई जा रही? क्या कर्मचारियों की मिलीभगत से खाद ऊंचे दामों पर निजी दुकानों तक पहुँचाई जा रही है? किसानों के लिए बने केंद्रों पर ही किसान अपमानित क्यों हो रहे हैं?

समिति कर्मचारियों ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों और स्थानीय पुलिस से करने की बात कही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि गोदाम से इस तरह जबरन खाद उठाई जाएगी, तो वे सुरक्षा के अभाव में काम नहीं कर पाएंगे। वहीं, किसान यूनियन के स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों को सुचारू रूप से और सम्मानजनक तरीके से यूरिया नहीं मिला, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। फिलहाल, बसतौली समिति पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल की निगरानी में वितरण प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Report BY: संजय कुमार राठौर

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