Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक खबर तेजी से फैल रही है जिसने सत्ता गलियारों से लेकर गलियों तक चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। यूपी विधानसभा के भीतर एक बड़ी सच्चाई और हाल ही में हुई एक ‘गुप्त बैठक’ ने राज्य की भविष्य की सियासत के संकेत दे दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के 403 विधायकों में से हर आठवां विधायक ब्राह्मण है, लेकिन पिछले 36 वर्षों में किसी ब्राह्मण मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सत्ता नहीं संभाली। इसी ‘सियासी सूखे’ को खत्म करने और समाज की एकजुटता दिखाने के लिए राजधानी में ब्राह्मण विधायकों का बड़ा जमावड़ा हुआ।
पंचानंद पाठक के घर हुई गुप्त रणनीति
कुशीनगर के विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर हुई इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपी के 52 ब्राह्मण विधायकों में से लगभग 50 ने इस बैठक में भाग लिया। हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर एक शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
Lakhimpur Kheri: ब्राह्मण विधायकों का राजनीतिक वजन
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में ब्राह्मणों की संख्या 52 है, जो किसी भी दल की सरकार बनाने या बिगाड़ने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि 1989 के बाद से कोई भी ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बना है। बैठक का संदेश स्पष्ट है कि ब्राह्मण समाज अब केवल वोट बैंक नहीं रहेगा, बल्कि सत्ता में अपनी हिस्सेदारी भी मांगेगा।
क्या यूपी को मिलेगा ब्राह्मण मुख्यमंत्री?
सियासी गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि उत्तर प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री ब्राह्मण समाज से हो सकता है। विधायकों की इस बड़ी संख्या में एक साथ मौजूदगी ने संकेत दिया है कि प्रदेश में राजनीतिक पटल पर बड़ा बदलाव आने वाला है।
Lakhimpur Kheri: 36 साल का इंतजार
नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश के आखिरी ब्राह्मण मुख्यमंत्री थे। उसके बाद से राज्य की राजनीति ओबीसी, दलित और ठाकुर नेताओं के इर्द-गिर्द रही। अब ब्राह्मण समाज में यह भावना मजबूत हो रही है कि प्रदेश के संतुलित विकास के लिए नेतृत्व एक बार फिर ब्राह्मण समाज से होना चाहिए।
संजय कुमार राठौर की रिपोर्ट के अनुसार, कुशीनगर विधायक के घर हुई यह बैठक केवल डिनर नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक स्क्रिप्ट का हिस्सा लगती है। यूपी में आने वाले दिनों में ब्राह्मणों की यह ‘एकता’ क्या रंग लाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
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