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मौत का ‘हाईवोल्टेज’ ड्रामा: ललमुन्ना गांव में पेड़ पर चढ़ा तेंदुआ, घंटों अटकी रही ग्रामीणों की सांसें!

Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी में मानव-वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला उत्तर खीरी वन रेंज के धौरहरा क्षेत्र का है, जहाँ ललमुन्ना गांव के बाहर एक आदमखोर प्रवृत्ति के तेंदुए ने उस वक्त हड़कंप मचा दिया जब वह जंगल से निकलकर आबादी के पास एक ऊंचे पेड़ पर जा चढ़ा। तेंदुए को गांव के इतने करीब देख ग्रामीणों के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि, खमरिया थाना पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, जिसके चलते तेंदुआ पेड़ से उतरकर सुरक्षित खेतों की ओर निकल गया और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

जंगल से निकलकर आबादी तक पहुँचा ‘गुलजार’

दुधवा नेशनल पार्क और कतर्नियाघाट की सीमाओं से सटे लखीमपुर खीरी के धौरहरा इलाके में वन्यजीवों की दस्तक अब आम बात हो गई है, लेकिन बुधवार की सुबह जो हुआ उसने ललमुन्ना गांव के निवासियों की रूह कंपा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों में गन्ने की छिलाई और कृषि कार्यों के लिए निकले थे, तभी अचानक झाड़ियों में हलचल हुई। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक विशालकाय तेंदुआ तेजी से दौड़ता हुआ आया और गांव के मुहाने पर स्थित एक विशाल पेड़ पर चढ़ गया।

Lakhimpur Kheri: गांव में दहशत 

जैसे ही यह खबर गांव में फैली कि “पेड़ पर तेंदुआ बैठा है”, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। लोग अपने घरों की छतों पर चढ़ गए और हाथों में लाठी-डंडे लेकर शोर मचाने लगे। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई। पेड़ पर बैठा तेंदुआ भी नीचे भारी भीड़ देखकर आक्रामक होने लगा और बीच-बीच में दहाड़ने लगा, जिससे दहशत और अधिक बढ़ गई। ग्रामीणों को डर था कि यदि तेंदुआ नीचे कूदा, तो वह किसी को भी अपना निवाला बना सकता है।
सूचना मिलते ही खमरिया थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। इसके साथ ही उत्तर खीरी वन रेंज के अधिकारी और कर्मचारी भी जाल और पिंजरे के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित करना था। पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए सबसे पहले घेराबंदी की और ग्रामीणों को तेंदुए से दूर हटाया। वन विभाग के विशेषज्ञों ने सलाह दी कि यदि तेंदुए को सुरक्षित रास्ता दिया जाए, तो वह हमला करने के बजाय वापस जंगल की ओर भाग सकता है।

पुलिस और वन विभाग ने एक रणनीतिक योजना के तहत भीड़ को शांत कराया और पेड़ के चारों ओर एक खाली गलियारा बनाया। लगभग 3 घंटे तक चले इस ‘हाईवोल्टेज ड्रामे’ के बाद, जब शोर कम हुआ, तो तेंदुआ धीरे-धीरे पेड़ से नीचे उतरा। नीचे उतरते ही वह बिजली की तेजी से दौड़ते हुए पास के गन्ने के घने खेतों में ओझल हो गया। पुलिस और वन विभाग की इस त्वरित और शांत कार्रवाई की सराहना हर कोई कर रहा है, क्योंकि जरा सी चूक से किसी की जान जा सकती थी। वहीं अब तेंदुआ भले ही आँखों से ओझल हो गया है, लेकिन ललमुन्ना और आसपास के गांवों में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है। गन्ने के ऊंचे खेत तेंदुए के छिपने के लिए आदर्श जगह हैं, इसलिए ग्रामीणों को डर है कि वह फिर से लौट सकता है। वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और चेतावनी जारी की है कि किसान अकेले खेतों में न जाएं।

Report By: संजय कुमार 

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