Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की मितौली तहसील आज उस समय नारों से गूँज उठी, जब सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने यूजीसी बिल-2026 को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उच्च शिक्षा में समानता और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लाए गए इस बिल के समर्थन में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और उप जिलाधिकारी (SDM) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
समानता और सशक्तिकरण की मांग
तहसील परिसर में एकत्र हुए अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि यूजीसी बिल-2026 उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह बिल न केवल शिक्षा के स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि बहुजन और पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
Lakhimpur Kheri: सचिन सिंह नितिन के नेतृत्व में प्रदर्शन
बहुजन समाज की मुखर आवाज माने जाने वाले सचिन सिंह नितिन के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद, अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उप जिलाधिकारी मितौली, मधुसूदन गुप्ता से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि उनकी आवाज को महामहिम राष्ट्रपति तक पहुँचाया जाए। ज्ञापन सौंपने और प्रदर्शन करने वालों में तहसील के वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं की लंबी सूची शामिल रही, जिनमें मुख्य रूप से एडवोकेट बलराम पाल, अखिलेश शक्ति, सोहन लाल वर्मा, नीरज गौतम। एडवोकेट हेमनाथ गौतम, सौरभ शर्मा, संदीप राठौर, योगेंद्र सिंह कनौजिया।
एडवोकेट चन्द्रभाल, अरविंद कुमार, रत्नेश कुमार, पुनेश राज। महामंत्री एडवोकेट पी.के. नीरज, कृष्णा कांत राठौर, दिनेश यादव। शिवम शर्मा, केवल गौतम, शरद यादव, मोहम्मद रजा जैदी। पप्पू सिंह चौहान, अनूप कुमार, मनोज, शिव शंकर राज। संतोष कुमार राज, वीरेंद्र, पुत्तू लाल गौतम, पंकज राज, धीरज यादव, रोहित कुमार और चंद वर्मा आदि शामिल रहे।

हजारों की संख्या में उमड़ा जनसमर्थन
अधिवक्ताओं के इस आंदोलन को स्थानीय जनता का भी भरपूर समर्थन मिला। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में यूजीसी बिल-2026 के समर्थन में अपनी सहमति जताई। लोगों का मानना है कि यदि यह बिल लागू होता है, तो ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र के मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के द्वार अधिक सुलभ हो जाएंगे। अधिवक्ताओं के इस कदम ने शासन-प्रशासन का ध्यान एक गंभीर विषय की ओर खींचा है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति को भेजा गया यह ज्ञापन दिल्ली के गलियारों में कितनी हलचल पैदा करता है। फिलहाल, मितौली में हुआ यह प्रदर्शन जनपद भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Report BY: संजय कुमार
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