Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक ओर जहाँ गाँवों को ‘स्मार्ट विलेज’ बनाने और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के जरिए ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का दावा कर रही है, वहीं लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी विकासखंड से आई एक तस्वीर इन दावों की कड़वी हकीकत बयां कर रही है। विकासखंड मोहम्मदी की ग्राम पंचायत दिलावरपुर की ‘बाग वाली गली’ आज विकास के उन तमाम सरकारी विज्ञापनों को चिढ़ा रही है जो शहरों की दीवारों पर चस्पा हैं। यहाँ के ग्रामीण आज के आधुनिक युग में भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ‘नरकीय’ जीवन जीने को मजबूर हैं।
आस्था के रास्ते पर ‘दलदल’ का पहरा
दिलावरपुर गाँव की यह गली कोई साधारण रास्ता नहीं है; यह वह मुख्य मार्ग है जो सीधे गाँव की मस्जिद की ओर जाता है। प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण, बुजुर्ग और बच्चे अपनी धार्मिक मान्यताओं के पालन हेतु इसी रास्ते से मस्जिद तक पहुँचते हैं। लेकिन वर्तमान में यह रास्ता रोड कम और एक खतरनाक दलदल ज्यादा नजर आता है। घुटनों तक भरे कीचड़, सड़ते हुए कूड़े और घरों के गंदे पानी ने इस पूरी गली को अपनी चपेट में ले लिया है।
आलम यह है कि नमाजियों को मस्जिद तक पहुँचने के लिए इस गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग नमाजी इस कीचड़ में फिसलकर गिर चुके हैं, जिससे न केवल उनके शरीर और कपड़े खराब होते हैं, बल्कि उनकी धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुँचती है।
Lakhimpur Kheri: ग्राम प्रधान की खामोशी से ग्रामीणों का आक्रोश
इस बदहाली का सबसे दुखद पहलू स्थानीय प्रशासन और ग्राम प्रधान की उदासीनता है। ग्रामीणों का सीधा आरोप ग्राम प्रधान कादिर पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने दर्जनों बार प्रधान को इस समस्या से अवगत कराया, लिखित और मौखिक रूप से गुहार लगाई, लेकिन प्रधान के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। ग्रामीणों का तीखा सवाल: क्या ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी केवल चुनाव के समय वोट मांगने तक सीमित है? चुनाव के दौरान जो विकास के वादे किए गए थे, वे अब इस कीचड़ में कहाँ दफन हो गए? भ्रष्टाचार की बू: ग्रामीण अब यह सवाल भी उठा रहे हैं कि ग्राम पंचायत के विकास के लिए जो बजट शासन से आता है, वह आखिर कहाँ खर्च किया जा रहा है? अगर मुख्य रास्तों की यह हालत है, तो गाँव के अन्य हिस्सों के हाल का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

स्वच्छ भारत मिशन का उड़ रहा मज़ाक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ का दिलावरपुर में सरेआम मज़ाक उड़ रहा है। गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण नालियों का पानी सड़कों पर ही जमा रहता है। यह जमा हुआ पानी अब संक्रामक बीमारियों का केंद्र बन चुका है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा पूरे इलाके में मंडरा रहा है। छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएँ इस रास्ते से निकलने में सबसे ज्यादा डरी रहती हैं। यह समस्या सिर्फ एक गाँव की नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक तंत्र की विफलता है जो कागजों पर तो ‘सब चंगा है’ दिखाता है, लेकिन धरातल पर जनता को दलदल में छोड़ देता है। मोहम्मदी का विकासखंड कार्यालय और जिला प्रशासन आखिर इस ओर आँखें मूँदकर क्यों बैठा है?
जवाबदेही किसकी? अगर ग्राम प्रधान कादिर समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं, तो खंड विकास अधिकारी (BDO) और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) ने अब तक इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया? स्मार्ट विलेज का सच: क्या मोहम्मदी के दिलावरपुर जैसे गाँवों को इसी तरह दलदल के भरोसे छोड़कर हम ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना पूरा कर पाएंगे? सरकारी बजट की जांच: ग्राम पंचायत दिलावरपुर में पिछले तीन वर्षों में हुए कार्यों का सोशल ऑडिट क्यों नहीं कराया जाता?
दिलावरपुर के युवाओं और बुजुर्गों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर मस्जिद वाली गली का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ और कीचड़ से निजात नहीं मिली, तो वे मोहम्मदी तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे। दिलावरपुर की यह गली न केवल ग्रामीणों के पैरों का कीचड़ है, बल्कि यह स्थानीय व्यवस्था के चेहरे पर लगा एक दाग भी है। आस्था और बुनियादी अधिकार के बीच खड़ा यह ‘दलदल’ कब खत्म होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल, ग्राम प्रधान की खामोशी और ग्रामीणों का बढ़ता गुस्सा मोहम्मदी की राजनीति में एक बड़े तूफान का संकेत दे रहा है। हमारा सीधा सवाल मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से है क्या दिलावरपुर के इन मासूम ग्रामीणों को इस नर्क से मुक्ति मिलेगी या इन्हें इसी तरह दलदल में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
Report BY: संजय कुमार राठौर
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