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पलिया से भीरा तक मौत की पटरियों पर ‘सुसाइडल स्टंट’, क्या सो रहा रेल प्रशासन?

Lakhimpur-Kheri

Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित लखीमपुर खीरी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जहाँ एक तरफ सरकार और रेलवे विभाग ‘सुरक्षित सफर’ के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं भीरा और पलिया के बीच पटरियों पर दौड़ती ट्रेन के पायदानों पर ‘मौत का तांडव’ देखने को मिल रहा है। यह मामला सिर्फ एक लड़के के स्टंट का नहीं है, बल्कि यह रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में लगी उस गंभीर सेंध का है, जो कभी भी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।

20 किलोमीटर का ‘सुसाइड सफर’

विशेष पड़ताल में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि भीरा क्षेत्र का रहने वाला एक किशोर, जो कूड़ा-करकट बीनने का काम करता है, पलिया से भीरा तक चलती ट्रेन में लगातार जानलेवा स्टंट करता रहा। पलिया स्टेशन से ट्रेन के रवाना होते ही यह किशोर पायदान पर जम गया और अगले 20 किलोमीटर तक मौत से खिलवाड़ करता रहा। वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह किशोर कभी ट्रेन के हैंडल छोड़कर हवा में लहराता, तो कभी तेज रफ्तार ट्रेन से पटरी के करीब झुककर पत्थरों को छूने की कोशिश करता। ताज्जुब की बात यह है कि इतने लंबे सफर के दौरान ट्रेन कई मोड़ों और सुनसान इलाकों से गुजरी, जहाँ खतरा सबसे ज्यादा था, लेकिन इस किशोर के सिर पर सवार स्टंटबाजी का भूत कम नहीं हुआ।

Lakhimpur Kheri: रेलवे विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े तीखे सवाल

इस घटना ने पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के सुरक्षा घेरे और दावों की पोल खोलकर रख दी है। पड़ताल के दौरान प्रशासन से ये पांच बड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी कहाँ थी? ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए RPF और GRP के जवान तैनात रहते हैं। क्या 20 किलोमीटर के सफर में एक बार भी किसी की नजर गेट पर लटके इस जानलेवा स्टंटबाज पर नहीं पड़ी? बिना टिकट प्रवेश कैसे मुमकिन? कूड़ा बीनने वाले ये नाबालिग लड़के बिना टिकट के सुरक्षित रेल कोच और गेट तक कैसे पहुँच रहे हैं? क्या स्टेशनों पर चेकिंग केवल कागजों तक सीमित है? गश्ती दल की निष्क्रियता: पलिया और भीरा के बीच नियमित अंतराल पर गश्त का दावा किया जाता है। क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा? रेलवे एक्ट का उल्लंघन: पायदान पर यात्रा करना रेलवे एक्ट की धारा 156 के तहत दंडनीय अपराध है, फिर भी इन स्टंटबाजों में कानून का कोई खौफ क्यों नहीं है? जिम्मेदारी किसकी? यदि इस दौरान किशोर ट्रेन के नीचे आ जाता या कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो रेलवे विभाग इसका ठीकरा किस पर फोड़ता?

जब कैमरे के सामने आया सच

पड़ताल के दौरान एक और चिंताजनक पहलू सामने आया। जब जागरूक नागरिकों ने इस खतरनाक मंजर का वीडियो बनाकर इसे रोकने की कोशिश की, तो वह किशोर डरा नहीं। उल्टे, उसने वीडियो बनाने वाले शख्स को ही धमकी दे डाली। उसने दबंगई दिखाते हुए वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया। एक नाबालिग किशोर में इस तरह की निडरता और कानून का अभाव यह संकेत देता है कि इनके पीछे या तो कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है या फिर ये बच्चे नशाखोरी जैसे गलत रास्तों पर निकल चुके हैं। कूड़ा बीनने की आड़ में ये बच्चे पटरियों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों का हिस्सा भी हो सकते हैं, जिसकी गहन जांच जरूरी है।

पलिया और भीरा के बीच का यह स्टंट महज एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी है। यह रेल मार्ग घने जंगलों और संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरता है। यदि समय रहते इन ‘स्टंटबाजों’ और बिना टिकट घूमने वाले संदिग्धों पर नकेल नहीं कसी गई, तो लखीमपुर खीरी का यह रेल मार्ग किसी दिन दर्दनाक सुर्खियों में होगा। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेल मंत्रालय और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया जाए, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर किशोर की शिनाख्त की जाए और संबंधित सुरक्षाकर्मियों की जवाबदेही तय की जाए।

Report By: संजय कुमार 

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