Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के तराई बेल्ट में स्थित जनपद लखीमपुर खीरी में मानव और वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सिंगाही थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सिंगहा कलां का है, जहाँ मंगलवार को गन्ने के खेत में तेंदुए के दो बच्चे (शावक) मिलने से हड़कंप मच गया। शावकों की मौजूदगी की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और किसानों ने खेतों की ओर जाना बंद कर दिया है।
गन्ना छीलने गए किसान के उड़े होश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिंगहा कलां निवासी रामशंकर वर्मा पटेल के गन्ने के खेत में सुबह जब मजदूर और स्वयं किसान गन्ना छीलने के लिए पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गन्ने की घनी फसल के बीच तेंदुए के दो छोटे बच्चे आराम करते हुए दिखाई दिए। जैसे ही रामशंकर की नजर उन पर पड़ी, वे डर के मारे सन्न रह गए और तुरंत शोर मचाते हुए खेत से बाहर सुरक्षित स्थान की ओर भागे। रामशंकर वर्मा ने बताया कि हम रोज की तरह गन्ना काटने खेत पर आए थे, लेकिन जैसे ही हम खेत के भीतर पहुंचे, झाड़ियों में कुछ हलचल हुई। करीब जाकर देखा तो वहां तेंदुए के दो बच्चे थे। गनीमत रही कि मादा तेंदुआ उस समय वहां मौजूद नहीं थी, वरना बड़ी अनहोनी हो सकती थी।”
Lakhimpur Kheri: ग्रामीणों में भय का माहौल
क्षेत्र के कई गांवों, विशेषकर सिंगहा कलां और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से तेंदुओं की लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ ही जंगली जानवरों का रिहाइशी इलाकों और खेतों की ओर रुख बढ़ गया है। गन्ने के ऊंचे और घने खेत इन जंगली बिल्लियों के लिए सबसे सुरक्षित शरणस्थली बन गए हैं। इस घटना के बाद से किसानों में इतना डर है कि वे अपनी तैयार फसल की कटाई करने से भी कतरा रहे हैं।

मौके पर वन विभाग की टीम
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। वन क्षेत्राधिकारी के निर्देश पर टीम तुरंत रामशंकर वर्मा के खेत पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित भी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शावक अभी छोटे हैं, जिसका मतलब है कि मादा तेंदुआ (मादा) भी आसपास के क्षेत्र में ही मौजूद है। मादा तेंदुआ अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी आक्रामक हो सकती है, इसलिए विभाग ने ग्रामीणों को सख्त चेतावनी दी है।
वहीं इस मामले में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि श्याम मोहन दीक्षित ने सभी ग्रामीणों और विशेषकर किसानों से अपील की है कि वे वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारी सावधानी बरतें। उन्होंने कहा कि खेतों में जाना जरूरी है, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर नहीं। सभी किसान भाई समूहों में ही खेत पर जाएं और अपने साथ लाठी-डंडा और शोर करने वाले उपकरण जरूर रखें। जबकि वन विभाग की टीम ने बताया कि वे इलाके में गश्त बढ़ा रहे हैं और तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर पिंजरा लगाने की भी योजना बनाई जा रही है ताकि तेंदुए को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा जा सके। फिलहाल, पूरे सिंगाही क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारी तैनात हैं और ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं।
आपको बता दें कि लखीमपुर खीरी का यह इलाका दुधवा नेशनल पार्क के बफर जोन के करीब होने के कारण अक्सर वन्यजीवों की आवाजाही का केंद्र बना रहता है, लेकिन आबादी के इतने करीब शावकों का मिलना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
Report By: संजय कुमार राठौर
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