Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर सरकार भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं लखीमपुर खीरी के नगर पंचायत बरबर से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सरकारी दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। यहाँ एक बेसहारा विधवा महिला को उसके ही घर से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। दबंगई के इस खेल में एक असहाय महिला दर-दर भटकने को मजबूर है।
क्या है पूरा मामला?
मामला तहसील मोहम्मदी क्षेत्र के गांधीनगर मोहल्ला (नगर पंचायत बरबर) का है। यहाँ की निवासी रामवती के अनुसार, उनकी पट्टे की जमीन पर एक आवास बना हुआ है। रामवती का कहना है कि उनके देवर मूलचंद ने उनकी इसी जमीन पर मकान का निर्माण करवाया था। चूंकि मूलचंद के पास अपनी कोई संतान या वारिस नहीं था, इसलिए उन्होंने अपनी भाभी की जमीन को ही अपना आधार बनाया था। पीड़िता का आरोप है कि देवर की मृत्यु के बाद एक अन्य महिला ने दबंगई के बल पर मकान और जमीन पर अपना दावा करना शुरू कर दिया है। रामवती का कहना है कि यह महिला अब उन्हें उनके ही घर से निकालने पर आमादा है और जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रही है। इस दबाव और धमकियों के चलते विधवा महिला मानसिक रूप से परेशान है और दर-दर न्याय की गुहार लगाने को मजबूर हो गई है।

Lakhimpur Kheri: खड़े हुए कई गंभीर सवाल?
न्याय की आस में रामवती ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मोहम्मदी को शिकायती पत्र सौंपकर अपनी पट्टे की जमीन को अवैध कब्जे से बचाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होते देख उन्होंने मुख्यमंत्री ऑनलाइन शिकायत पोर्टल (IGRS) पर भी अपनी व्यथा दर्ज कराई है, ताकि उनकी आवाज शासन के उच्च स्तर तक पहुंच सके। बावजूद इसके, अब तक किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में पीड़िता को न्याय मिलता नहीं दिख रहा है। इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक विधवा महिला की जमीन और मकान पर खुलेआम कब्जे की कोशिश के बावजूद प्रशासन की चुप्पी क्यों है? आखिर दबंग महिला को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वह कानून को चुनौती देने का साहस कर रही है? और सबसे अहम सवाल यह कि क्या प्रशासन तब हरकत में आएगा जब पीड़िता पूरी तरह बेघर हो जाएगी?
रामवती की यह लड़ाई केवल एक संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विधवा महिला की अस्मिता, सुरक्षा और उसके सिर की छत बचाने की जंग है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एसडीएम मोहम्मदी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायतों पर प्रशासन कितनी संवेदनशीलता दिखाता है और क्या पीड़िता को समय रहते न्याय मिल पाता है, या फिर दबंगई के आगे एक बार फिर सिस्टम असहाय नजर आएगा।
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