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योगी सरकार के स्वच्छता दावों को पलीता लगा रहे अधिकारी, हरिहरापुर में नालियों का गंदा पानी सड़कों पर, बीमारी के साए में जनता

Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन भले ही ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस और आदर्श ग्राम बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी ब्लॉक स्थित ग्राम हरिहरापुर की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां विकास की गंगा बहने के बजाय, नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है।

गंदगी के अंबार से लोग परेशान

दरअसल, जिले के हरिहरापुर गांव की मुख्य गलियां इस वक्त तालाब का रूप ले चुकी हैं। गांव की नालियां पूरी तरह कचरे से चोक हो गई है, जिसके कारण पानी की निकासी रुक गई है। आलम यह है कि घरों से निकलने वाला गंदा पानी अब लोगों के दरवाजों और मुख्य रास्तों पर जमा हो रहा है। कीचड़ और सड़ते कचरे के बीच से होकर ग्रामीण, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिससे गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ठहरे हुए गंदे पानी और कचरे के कारण गांव में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा रोष और डर है कि यह गंदगी डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी घातक बीमारियों को दावत दे रही है। छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें इसी दूषित माहौल के बीच से स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग या सफाई कर्मियों की टीम गांव का रुख नहीं कर रही है।

इस समस्या पर जब ‘रिपोर्ट’ ने पड़ताल की, तो विरोधाभासी बयान सामने आए। जिसमें ग्रामीणों का कहना है कि “हमने कई बार ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता है। सफाई कर्मी गांव में आता ही नहीं है।” जबकि इसको लेकर ग्राम प्रधान का कहना है कि नालियों की मरम्मत और सफाई के लिए बजट का अभाव है या फिर सफाई कर्मी की नियुक्ति में तकनीकी दिक्कतें हैं। कुछ मामलों में प्रधान का दावा है कि सफाई नियमित होती है, लेकिन ग्रामीण खुद नालियों में कचरा फेंक देते हैं।

 

वहीं, ब्लॉक स्तर के अधिकारियों का कहना है कि शासन की ओर से स्वच्छता के लिए पर्याप्त फंड जारी किया जा चुका है। यदि काम नहीं हो रहा है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। दावों के इस खेल में हरिहरापुर की जनता पिस रही है। एक तरफ अधिकारी कागजों पर विकास की लकीरें खींच रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रधान बजट का रोना रो रहे हैं।

Lakhimpur Kheri: सफाई व्यवस्था पर सवालिया निशान? 

मोहम्मदी खीरी के इस गांव की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर सफाई कर्मियों की तैनाती केवल कागजों तक ही क्यों सीमित है? क्या उच्चाधिकारी केवल ऑफिसों में बैठकर रिपोर्ट लेते हैं या कभी धरातल पर आकर वास्तविक स्थिति का जायजा भी लेते हैं? परेशान ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नालियों की सफाई कराकर पानी निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर हरिहरापुर की जनता को इस नारकीय जीवन से मुक्ति दिलाता है या नहीं।

Report BY: संजय कुमार राठौर

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