Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के रतलाम ज़िले के पिपलौदा तहसील स्थित पंचेवा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ़ स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गांव की पंचायत और कुछ ग्रामीणों ने प्रेम विवाह और अंतरजातीय शादी करने वाले युवक-युवतियों तथा उनके परिवारों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करने का फरमान जारी कर दिया है।यह फैसला सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
Madhya Pradesh: छह महीने में आठ लव मैरिज, बढ़ा तनाव:
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में गांव के आठ लड़के-लड़कियों ने परिवार की सहमति के बिना घर से भागकर शादी की। इनमें कुछ विवाह अंतरजातीय बताए जा रहे हैं। पंचायत का कहना है कि इन घटनाओं से गांव का माहौल बिगड़ रहा है और अन्य बच्चों पर “गलत असर” पड़ रहा है।इसी नाराज़गी के चलते गांव के बुज़ुर्गों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चार दिन पहले एक विशेष बैठक बुलाई।
Madhya Pradesh: पंचायत बैठक में लिया गया विवादित फैसला:
यह बैठक पिपलौदा तहसील के पंचेवा गांव में आयोजित हुई, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जो भी युवक-युवती परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ प्रेम विवाह करेगा, उसके साथ-साथ उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।बैठक से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिनमें एक व्यक्ति हाथ में रजिस्टर लेकर पंचायत का फैसला पढ़ता नजर आ रहा है।वायरल वीडियो में साफ़ तौर पर कहा जा रहा है कि यह फैसला “पंचेवा गांव के सभी निवासियों” द्वारा लिया गया है। वीडियो में यह भी चेतावनी दी गई है किजो लड़का या लड़की भागकर शादी करेगाजोपरिवार उनका साथ देगा जो गवाह बनेगा या मदद करेगा उन सभी का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
सामाजिक बहिष्कार के कठोर नियम:
पंचायत द्वारा घोषित प्रतिबंध बेहद सख़्त और विवादित हैं। इनमें शामिल हैं—सेवाओं पर पूर्ण रोक,प्रेम विवाह करने वाले परिवार के घर ,न पंडित पूजा कराने जाएगा न नाई बाल काटेगा,न दूधवाला दूध देगा आर्थिक नाकेबंदी परिवार को गांव में कोई काम नहीं दिया जाएगा उनके खेत कोई भी व्यक्ति बटाई या लीज़ पर नहीं लेगा सामाजिक कटाव किसी भी शादी, तेरहवीं या सामाजिक कार्यक्रम में बुलावा नहीं गांव के सार्वजनिक आयोजनों से पूरी तरह दूर रखा जाएगा मदद करने वालों पर भी कार्रवाई जो भी व्यक्ति ऐसे जोड़ों को शरण देगा विवाह में गवाह बनेगा या किसी भी तरह से समर्थन करेगा उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
Madhya Pradesh: महिलाओं की भूमिका पर भी विवाद:
स्थानीय लोगों के अनुसार, तनाव तब और बढ़ गया जब कुछ महिलाओं ने थाने और मजिस्ट्रेट के सामने अपने माता-पिता की पहचान बताने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपराओं के खिलाफ है, जबकि कानून महिलाओं को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है। इस फैसले के बाद बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या पंचायत संविधान से ऊपर हो सकती है? भारत का संविधान हर नागरिक को—विवाह की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार प्रदान करता है। सामाजिक बहिष्कार जैसे फैसले संविधान और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन माने जाते हैं। ।
Madhya Pradesh: प्रशासन की सख़्त चेतावनी:
अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट शालिनी श्रीवास्तव ने जावरा एसडीएम को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं प्रशासन ने साफ कहा है कि— “संविधान से ऊपर कोई भी पंचायत या व्यक्ति नहीं हो सकता।” यदि जांच में सामाजिक बहिष्कार की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।रतलाम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार ने बताया कि—“ग्रामीणों द्वारा जारी किया गया वीडियो हमारे संज्ञान में आया है। संबंधित थाना अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत मिलने पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।”
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