Meerut News : मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय की बीकॉम ऑनर्स की एक छात्रा द्वारा जिम ट्रेनर पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद कैंपस में तनाव का माहौल बन गया है। छात्रा ने कुलसचिव और कुलपति को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्या हैं छात्रा के आरोप
छात्रा के अनुसार, 12 फरवरी की शाम वह रोज़ की तरह जिम में अभ्यास करने के बाद बाहर निकल रही थी। इसी दौरान जिम ट्रेनर ने कथित तौर पर उसका रास्ता रोका और उससे आपत्तिजनक बातें कहीं। आरोप है कि ट्रेनर ने छात्रा को डिनर पर चलने का प्रस्ताव दिया और चेहरे की डेंटिंग/मेकअप कराने का ऑफर भी किया। छात्रा का कहना है कि इस व्यवहार से वह मानसिक रूप से असहज हो गई और उसे अपमान का अनुभव हुआ।
शिकायती पत्र में छात्रा ने साफ लिखा है कि इस तरह की घटनाएं छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उसने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो छात्राओं को विश्वविद्यालय छोड़ने तक पर मजबूर होना पड़ सकता है।
वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
मामला तब और गरमा गया जब संबंधित शिक्षक का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से वीडियो की सत्यता और संदर्भ की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में भी स्पष्ट किया गया है कि वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन इससे पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
जिम ट्रेनर ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
आरोपों में घिरे शारीरिक शिक्षा विभाग के शिक्षक संदीप रंधावा ने सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी छात्रा से न तो अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया और न ही किसी तरह का व्यक्तिगत प्रस्ताव दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जिम में रोज़ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते हैं और वे केवल अपनी ड्यूटी और नियमों का पालन कराते हैं।
रंधावा का यह भी कहना है कि पहचान पत्र मांगने या अनुशासन बनाए रखने पर कुछ छात्र-छात्राएं नाराज़ हो जाती हैं, जिसके चलते इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले भी ऐसी शिकायत हुई थी लेकिन जांच में कोई ठोस तथ्य नहीं मिले थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन की सख्त नजर
विश्वविद्यालय के प्रेस प्रवक्ता प्रोफेसर मुकेश शर्मा ने बताया कि कुलपति ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राओं की सुरक्षा और गरिमा विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर दोष सिद्ध होता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।






