Meerut news: 17 दिसंबर को जब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जामिनेशन (ESE) 2025 का रिजल्ट घोषित किया, तो बुलंदशहर के 24 वर्षीय मानवेन्द्र सिंह ने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 112 हासिल कर इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज में जगह बना ली। यह उपलब्धि सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और धैर्य का नतीजा है।
सेरेब्रल पाल्सी के साथ संघर्ष भरी शुरुआत
मानवेन्द्र बुलंदशहर के आवास विकास क्षेत्र के निवासी हैं और सेरेब्रल पाल्सी जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्या से पीड़ित हैं, जिसका पता उन्हें महज छह महीने की उम्र में चला था। बचपन में वह गर्दन तक ठीक से नहीं संभाल पाते थे और शरीर के दाहिने हिस्से में लगातार जकड़न रहती थी। रोजमर्रा के छोटे काम भी उनके लिए चुनौती थे। पेंसिल पकड़ने में असमर्थ मानवेन्द्र ने सालों तक मुट्ठी में पेंसिल दबाकर लिखा और धीरे-धीरे अभ्यास से अपने बाएं हाथ को इतना सक्षम बनाया कि वह पढ़ाई में आगे बढ़ सके।
Meerut news: मां की मेहनत और इच्छाशक्ति का साथ
उनकी मां रेणु सिंह, जो एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल हैं, बताती हैं कि बेटे का सफर लगातार जिद और इच्छाशक्ति से भरा रहा। इलाज के लिए वह देशभर में 50 से ज्यादा डॉक्टरों और अस्पतालों में गईं। आखिरकार दिल्ली में लंबे इलाज से उसकी स्थिति स्थिर हो पाई। उन्होंने कहा कि इलाज जरूरी था, लेकिन उससे कहीं ज्यादा मानवेन्द्र की इच्छाशक्ति ने उसकी राह आसान की।
Meerut news: पिता की मौत और बढ़ती जिम्मेदारियां
17 साल की उम्र में पिता की लंबी बीमारी के बाद हुई मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया। मानवेन्द्र इस आघात से टूट जरूर गए, लेकिन समय के साथ खुद को संभालते हुए परिवार की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर ले लीं। पढ़ाई में वह हमेशा अव्वल रहा। 12वीं के बाद सुरक्षित विकल्प चुनने की सलाह के बावजूद उसने IIT का लक्ष्य तय किया। उसने GATE परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 63 हासिल की और 2024 में IIT पटना से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया।
पहले ही प्रयास में इंजीनियरिंग सर्विसेज में चयन
Meerut news: ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली जाकर उसने इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की। यह परीक्षा प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीन चरणों में होती है। पहले ही प्रयास में तीनों चरण पार कर मानवेन्द्र ने AIR 112 हासिल की और इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज में चयन पाया। उनकी मां के लिए यह रैंक गर्व की बात है, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम वह संघर्ष है, जिसमें मानवेन्द्र ने हालात के बावजूद अपने सपनों का स्तर कभी कम नहीं होने दिया।
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