Meerut News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर इलाके में लंबे समय से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर रौब जमाने वाले फर्जी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के डिप्टी डायरेक्टर का खेल मेरठ STF ने धर दबोचा है। आरोपी मनोज चौहान ने खुद को दिल्ली का उच्चाधिकारी बताकर न केवल सरकारी कामकाज में बाधा डाली, बल्कि गलत कामों के लिए दबाव बनाकर कईयों को ब्लैकमेल करने की कोशिश की। शुक्रवार को विशेष सूचना के आधार पर STF की टीम ने नगीना रोड पर गुलमोहर रेस्टोरेंट के पास से उसे दबोच लिया। यह गिरफ्तारी न केवल स्थानीय स्तर पर फर्जीवाड़े की जड़ें उखाड़ने का प्रतीक है, बल्कि आम जनता के लिए भी एक चेतावनी है कि झूठे रुतबे के जाल से सावधान रहें।
मनोज चौहान, पुत्र नरेंद्र सिंह और निवासी त्रिलोकावाला (थाना नगीना), वर्षों से खुफिया तंत्र का कथित ‘वरिष्ठ अधिकारी’ बनकर घूम रहा था। वह वर्दीधारी पुलिसकर्मियों से फोन पर बातें करता और खुद को IB का डिप्टी डायरेक्टर बताकर धमकियां देता। ‘दिल्ली से आया हूं, सब जानता हूं’ जैसे जुमलों से वह अफसरों को डराने की कोशिश करता। नतीजा? सरकारी विभागों में अनावश्यक हस्तक्षेप, गलत फायदे के लिए दबाव, और कई जगहों पर कार्यप्रणाली में बाधा। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि वह नगीना और धामपुर क्षेत्र में खासा सक्रिय था, जहां उसके फर्जी दावों ने कई छोटे-मोटे विवादों को जन्म दिया। लेकिन अब STF के शिकंजे में फंसते ही उसका यह ‘रौब का खेल’ खत्म हो गया।
मेरठ STF निरीक्षक रविंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ शिकायतें लंबे समय से आ रही थीं। विभिन्न थानों और विभागों से मिली जानकारी में सामने आया कि मनोज ने कई मौकों पर अपने फर्जी आईकार्ड और संपर्कों का इस्तेमाल किया। कुछ मामलों में वह पुलिस को फोन कर केसों में हस्तक्षेप की कोशिश कर चुका, तो कहीं प्रशासनिक अफसरों पर गलत कामों का दबाव बनाया। उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देश पर STF ने जाल बिछाया। शुक्रवार दोपहर को धामपुर पहुंची टीम ने नगीना रोड पर निगरानी रखी और जैसे ही मनोज गुलमोहर रेस्टोरेंट के पास दिखा, उसे हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में उसके पास से फर्जी दस्तावेज बरामद हुए, जिनकी जांच जारी है।
गिरफ्तारी के बाद STF टीम मनोज को धामपुर कोतवाली ले गई, जहां देर रात तक सख्त पूछताछ चली। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने कई अधिकारियों और आम लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की। पुलिस अब यह जांच रही है कि क्या उसने कहीं आर्थिक लाभ लिया या किसी बड़े घोटाले का हिस्सा था। मनोज के फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और संपर्क सूची खंगाली जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपी के कई ‘कनेक्शन’ स्थानीय स्तर पर थे, जो अब STF के रडार पर हैं। क्या यह अकेला कारनामा था या इसके पीछे कोई गिरोह सक्रिय है? यह सवाल STF की जांच का केंद्र बिंदु है।







