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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मनरेगा खत्म, नया कानून लागू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी बिल, 2025 (VB-G-RAM-G) को मंजूरी दे दी है। VB-G-RAM-G बिल पर लोकसभा में करीब 14 घंटे चर्चा हुई थी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, “शुरुआत में यह सिर्फ नरेगा थी। 2009 के चुनाव के समय वोट के लिए इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया।”

Mgnrega bill: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी बिल, 2025 (VB-G-RAM-G) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह बिल अब कानून बन गया है। यह नया कानून करीब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा। सरकार यह कानून शीतकालीन सत्र में लाई थी और 18 दिसंबर को संसद से पास हो गया था।

चिदंबरम का हमला , “महात्मा गांधी की दोबारा हत्या”

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना, उनकी दोबारा हत्या करने जैसा है। पहली बार 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या हुई थी, अब दूसरी बार उनका नाम मिटाकर उन्हें मारा जा रहा है।” चिदंबरम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गांधी और नेहरू को सरकारी रिकॉर्ड से हटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे भारतीय जनता के दिलों में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा, “गांधी और नेहरू बुद्ध या यीशु की तरह हैं। कोई भी सरकारी आदेश उन्हें लोगों के मन से नहीं मिटा सकता।”

Mgnrega bill: “125 दिन रोजगार का दावा सिर्फ काग़ज़ों में”

चिदंबरम ने सरकार के 125 दिन रोज़गार के दावे को भी गलत बताया। उनका कहना था, अभी देश में मनरेगा का राष्ट्रीय औसत सिर्फ 50 दिन है, बहुत कम मजदूर ही पूरे 100 दिन का काम पूरा कर पाते हैं। ऐसे में 125 दिन का दावा हकीकत से दूर है, उन्होंने यह भी कहा कि VB-G-RAM-G जैसा नाम ग्रामीण भारत, खासकर दक्षिण भारत के लोगों के लिए समझना ही मुश्किल है। “हो सकता है कुछ मंत्रियों को भी यह न पता हो कि इस नाम का मतलब क्या है।”

Mgnrega bill: नया कानून क्यों विवादों में है?

चिदंबरम के मुताबिक: मनरेगा पहले यूनिवर्सल योजना थी, जो हर ग्रामीण जिले में लागू होती थी, नया कानून इसे चुने हुए जिलों तक सीमित कर देता है। अब यह पूरी तरह राष्ट्रीय योजना नहीं रही। शहरी और कस्बाई पंचायत क्षेत्र इससे बाहर हो जाएंगे, फंडिंग पर भी सवाल, पहले केंद्र सरकार पूरी मजदूरी और 75% मटेरियल खर्च देती थी। अब राज्यों को भी खर्च में हिस्सेदारी करनी होगी, अगर किसी राज्य के पास पैसा नहीं होगा, तो वहां योजना लागू ही नहीं हो पाएगी।

सोनिया गांधी का बयान, “मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया”

एक दिन पहले सोनिया गांधी ने भी वीडियो जारी कर सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा, “सरकार ने गरीबों को रोज़गार देने वाली मनरेगा योजना पर बुलडोजर चला दिया है। अब दिल्ली में बैठकर तय होगा कि किसे, कितना और कहां काम मिलेगा।”

Mgnrega bill: संसद में 14 घंटे चली बहस

VB-G-RAM-G बिल पर लोकसभा में करीब 14 घंटे चर्चा हुई थी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, “शुरुआत में यह सिर्फ नरेगा थी।
2009 के चुनाव के समय वोट के लिए इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया।” इस बिल के विरोध में विपक्ष ने संसद परिसर में मार्च निकाला,
जबकि टीएमसी सांसदों ने रातभर प्रदर्शन किया।

नए कानून से जुड़े 5 बड़े सवाल–जवाब

Mgnrega bill: सवाल 1: क्या MGNREGA पूरी तरह खत्म हो जाएगा? जवाब: हाँ। नया कानून साफ़ तौर पर 2005 के MGNREGA को रद्द (Repeal) करता है। अब सिर्फ VB-G-RAM-G ही लागू रहेगा। सवाल 2: नया कानून कब लागू होगा और पुराने जॉब कार्ड का क्या होगा? जवाब: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून प्रभावी हो गया है, 6 महीने के भीतर राज्यों को नई योजना बनानी होगी। नया पंजीकरण डिजिटल और बायोमेट्रिक सिस्टम से होगा, पुराने जॉब कार्ड अमान्य हो सकते हैं।सवाल 3: मजदूरी बढ़ेगी या नहीं? जवाब: बिल में मजदूरी दर तय नहीं की गई है। केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग तय करेंगी। फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि मजदूरी बढ़ेगी या नहीं। सवाल 4: क्या सभी को 125 दिन का काम मिलेगा?, जवाब: नहीं, कुछ शर्तें होंगी, परिवार ग्रामीण क्षेत्र का होना चाहिए, वयस्क सदस्य बिना कौशल वाला श्रम करने को तैयार हों, काम सिर्फ सरकारी सार्वजनिक परियोजनाओं में मिलेगा, काम मांगने पर ही दिया जाएगा।  सवाल 5: बोवाई-कटाई के समय मजदूर क्या करेंगे?, जवाब: राज्य सरकारें इस दौरान सरकारी काम अस्थायी रूप से रोक सकती हैं। ताकि खेतों में मजदूरों की कमी न हो, मजदूर उस समय खेती में काम करेंगे और सरकारी काम बाद में मिलेगा।

 

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