Middle East Crisis: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने वैश्विक अशांति और युद्ध की स्थिति पर बड़ा बयान दिया है। नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक शांति में भारत की भूमिका
भागवत ने कहा कि दुनिया तेजी से भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। उनके अनुसार, कई देश चाहते हैं कि भारत मध्यस्थता कर वर्तमान युद्धों को खत्म करने में भूमिका निभाए। उन्होंने विशेष रूप से मध्य पूर्व क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां स्थायी शांति स्थापित करने में भारत सक्षम है।
Middle East Crisis: धर्म आधारित संतुलन की जरूरत
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संतुलन बहाल करने के लिए ‘धर्म’ की मूल भावना को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत के पास वह सांस्कृतिक और नैतिक आधार है, जो वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित कर सकता है।
वर्तमान वैश्विक व्यवस्था पर सवाल
भागवत ने मौजूदा भू-राजनीतिक हालात की आलोचना करते हुए कहा कि आज दुनिया ‘जंगल के कानून’ पर चल रही है, जहां ताकतवर देश अपने हितों के लिए कमजोरों को दबाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शक्ति का दुरुपयोग अक्सर आक्रामकता को सही ठहराने के लिए किया जाता है।
Middle East Crisis: भारतीय मूल्यों की प्रासंगिकता
उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन मूल्य जैसे सत्य, सेवा और अहिंसा आज भी प्रासंगिक हैं। जैन, बौद्ध और सिख परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सभी का मूल संदेश मानवता और नैतिक आचरण है।
भागवत ने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक नेतृत्व के लिए पहले आंतरिक रूप से मजबूत होना होगा। उन्होंने समाज में नैतिकता और एकता को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि देश दुनिया को स्थिरता और शांति का मार्ग दिखा सके।







