MP News: मध्य प्रदेश में रबी सीजन की प्रमुख फसलें गेहूं, चना, सरसों और मसूर की कटाई तेज़ी से जारी है। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों से महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा है कि वे फसल कटाई के बाद पराली जलाने से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी धीरे-धीरे कम हो जाती है, जिससे भविष्य में उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पराली को चारे के रूप में करे तैयार
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में “हैप्पी सीडर” जैसी उन्नत मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह मशीन बिना जुताई के सीधे फसल अवशेषों के बीच बीज बोने की सुविधा देती है, जिससे समय, श्रम और लागत तीनों की बचत होती है। साथ ही, इससे खेत में मौजूद अवशेष भी मिट्टी के लिए जैविक खाद का काम करते हैं। उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि वे फसल अवशेषों को बेकार न समझें, बल्कि उन्हें संसाधन के रूप में उपयोग करें। पराली को चारे के रूप में तैयार कर पास की गौशालाओं या पशुपालकों को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इस पहल से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और पशुपालन क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
MP News: किसानों को फसलों की देखभाल में न हो परेशानी
सरकार द्वारा विधानसभा क्षेत्र स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को किराए पर आधुनिक कृषि उपकरण आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे वे भी नई तकनीकों का लाभ उठा पाएंगे और उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मानसून के बाद सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को फसलों की देखभाल में किसी प्रकार की परेशानी न हो। ग्वालियर मंडल के दतिया जिले में आयोजित एक बड़े किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों के कठिन परिश्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद किसान पूरे देश के लिए अन्न उत्पादन में जुटे रहते हैं, जो अत्यंत सराहनीय है। सरकार किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि उपकरण अपनाने, फसल विविधीकरण करने, तथा पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी सहायक गतिविधियों को बढ़ाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर जोर दिया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने किया किसान के खेत का दौरा
इस दौरान मुख्यमंत्री ने दतिया जिले के भांडेर क्षेत्र में एक किसान के खेत का दौरा भी किया। वहां उन्होंने भूसा काटने वाली मशीन का निरीक्षण किया और खुद उस पर सवारी कर उसके कार्य को समझा। उन्होंने किसान से संवाद कर मशीन के उपयोग और उससे होने वाले लाभों की जानकारी ली। कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने दतिया जिले के विकास के लिए 62.23 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का विकास होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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