MP Vyapam scam: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में एक बार फिर न्यायिक सख्ती देखने को मिली है। इंदौर स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने पीएमटी-2011 परीक्षा में फर्जी तरीके से परीक्षा देने वाले 12 डमी उम्मीदवारों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी दोषियों पर 6,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
डमी उम्मीदवार बनकर दी थी पीएमटी परीक्षा
सीबीआई जांच में सामने आया कि इन सभी आरोपियों ने असली परीक्षार्थियों से साठगांठ कर उनके स्थान पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी। पहचान बदलकर, जाली दस्तावेजों और फर्जी प्रवेश पत्रों के सहारे इन डमी उम्मीदवारों ने परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया और परीक्षा दी।
MP Vyapam scam: इन 12 आरोपियों को मिली सजा
सजा पाने वालों में आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह, सत्येंद्र वर्मा, धीरेंद्र तिवारी, बृजेश जायसवाल, दुर्गा प्रसाद यादव, राकेश कुर्मी, नरेंद्र चौरसिया, अभिलाष यादव, खूबचंद राजपूत, पवन राजपूत, लखन धनगर और सुंदरलाल धनगर शामिल हैं। वहीं, घटना के समय नाबालिग रहे दीपक गौतम के मामले में किशोर न्याय बोर्ड पहले ही कार्रवाई कर चुका है।
ऐसे खुला था फर्जीवाड़े का खेल
यह मामला तब उजागर हुआ जब इंदौर के सशक्त उत्कृष्ट विद्यालय के उप-प्राचार्य ने व्यापम द्वारा आयोजित पीएमटी-2011 परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई। 24 जुलाई 2011 को सत्येंद्र वर्मा को आशीष यादव बनकर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इसके बाद तुकोगंज थाने में केस दर्ज हुआ।
MP Vyapam scam: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच
शुरुआत में राज्य पुलिस ने सीमित आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। जांच में यह सामने आया कि बिचौलियों के एक संगठित नेटवर्क के जरिए डमी उम्मीदवारों को होटल में ठहराया गया और सुनियोजित तरीके से परीक्षा दिलाई गई।
व्यापम घोटाले पर कार्रवाई का अहम फैसला
कोर्ट ने दस्तावेजी साक्ष्यों, होटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया। यह फैसला व्यापम घोटाले में चल रही व्यापक कानूनी कार्रवाई का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता पर लगे दाग को उजागर करता है।
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