New Year: विश्व वर्ष 2025 के अशांति के चौराहे से निकलकर नया वर्ष 2026 शांति का प्रतीक हो, ऐसी कामनाएं यूएनओ के महा सचिव एंटोनियो गुटेरेस ने की है। दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति पर संयुक्त राष्ट् संगठन की स्थापना की गई थी। इसका उद्येश्य था कि युद्ध से पस्त विश्व में शांति स्थापित हो। इसके लिए सभी देशों ने संयुक्त राष्ट् की स्थापना की। इसकी जनरल एसेंब्ली में सभी देश सम्मिलित किये गये। और दूसरा प्लेटफार्म बनाया सुरक्षा परिषद को। परिषद में 15 सदस्यों को रखा गया। इसके पांच स्थाई सदस्य बनाये गये। बाकी दस सदस्यों को बारी-बारी से सदस्य बनाने का अवसर दिया गया। लेकिन जो पांच सदस्य हैं और बनाते वक्त भी थे, उनको स्थाई सदस्यता दी गई। ये हैं-अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन और फ्रांस।
1945 में बनी इस संस्था में, जो पांच सदस्य हैं, वे सामरिक और विकसित देश होने की वजह से सम्मानित पांच सदस्य अब तक बने हैं। इन पांच देशों के पास वीटो पावर दी गई थी। यह इस पावर का इस्तेमाल किसी भी मुद्दे पर कर सकते हैं। यदि एक स्थाई सदस्य देश किसी मुद्दे पर राजी नहीं है, तो उस प्रस्ताव को रद्द माना जाता है। यह प्रक्रिया लगातार चल रही है। इस विश्व संस्था को बने हुए 80 वर्ष हो चुके हैं। भारत 1945 की स्थिति से कई गुना बेहत्तर स्थिति में है। यहां तक कि विश्व अर्थ व्यवस्था में चौथे नंबर पर पहुंच चुका है। और विकासशील देशों में अग्रणी है। इसके बावजूद भारत को वह सम्मान नहीं दिया जा रहा है, जिसका वह स्वतः दावेदार है।
सामरिक शक्ति से लेकर आर्थिक शक्ति में इन स्थाई सदस्यों से काफी आगे है। फिर स्थाई सदस्यों में क्यों नहीं अपना स्थान बना पा रहा है। इस बात की चर्चा संयुक्त राष्ट् संघ की जनरल ऐसेंबली से लेकर उन देशों के साथ भी होनी चाहिए, जिनके पास वीटो पावर है। लगता है यह संस्था अभी अपने सही फार्म में नहीं आ पाई। इसी कारण अंतर्राष्ट्ीय मंच पर देशों में लड़ाइयां चल ही रही हैं। शांति का वातावरण बनाने में वह काम नही ंकर पा रही है, जिसकी सबको अपेक्षा थी।
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