Noida News: उत्तर प्रदेश के हाई-टेक शहर नोएडा की एक पॉश सोसायटी से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि आधुनिक समाज की सहिष्णुता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर, जहाँ पूरा देश शिवालयों में उमड़ रहा था, वहीं नोएडा की एक रिहायशी सोसायटी में भगवान शिव की आराधना कर रहे श्रद्धालुओं को भारी अपमान और विरोध का सामना करना पड़ा। एक महिला ने न केवल चल रही पूजा को बीच में रुकवा दिया, बल्कि पुजारी और वहां मौजूद भक्तों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया।
भक्ति के बीच अचानक हुआ हंगामा
घटनाक्रम के अनुसार, नोएडा की इस सोसायटी के निवासियों ने सर्वसम्मति से कॉमन एरिया में महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर एक लघु पूजन और आरती का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें सोसायटी के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बड़ी श्रद्धा के साथ शामिल हुए थे। मंत्रोच्चार और भजनों के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय था। इसी बीच सोसायटी में रहने वाली एक महिला वहां पहुंची और अचानक शोर मचाना शुरू कर दिया। महिला का दावा था कि इस आयोजन से उसे ‘डिस्टर्बेंस’ हो रहा है। उसने तुरंत पूजा बंद करने का फरमान सुना दिया। वहां मौजूद लोग हक्के-बक्के रह गए कि आखिर साल में एक बार होने वाले इस पवित्र आयोजन से किसी को इतनी समस्या कैसे हो सकती है?
Noida News: पुजारी की विनम्रता बनाम महिला का अहंकार
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि आयोजन करा रहे पुजारी जी ने स्थिति को संभालने की बहुत कोशिश की। पुजारी ने हाथ जोड़कर महिला से बेहद शांत लहजे में कहा— “बेटी, हमने तो आपको भी इस पूजा में सप्रेम आमंत्रित किया था। यह महादेव का दिन है, आप भी आशीर्वाद लीजिए।” जब महिला नहीं मानी, तो पुजारी और अन्य भक्तों ने उसे समझाने का प्रयास किया कि पूजा बस समापन की ओर है और इसमें मात्र 1 से 2 घंटे का समय ही लगेगा। लेकिन महिला का गुस्सा सातवें आसमान पर था। वह लगातार चिल्लाती रही और श्रद्धालुओं को वहां से हटने के लिए कहती रही। उसने किसी की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा और धार्मिक अनुष्ठान को ‘शोर-शराबा’ करार दिया।
सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद
इस घटना का वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर साझा किया गया, यह जंगल की आग की तरह फैल गया। यूजर्स ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि:
* क्या अब हिंदू समाज को अपने त्योहार मनाने के लिए भी किसी से ‘सर्टिफिकेट’ लेना होगा?
* अगर अपनी ही सोसायटी में, जहाँ हम टैक्स और मेंटेनेंस देते हैं, वहां 2 घंटे की पूजा नहीं हो सकती, तो फिर कहाँ होगी?
* क्या यही वह ‘आधुनिकता’ है जो हमें अपनी जड़ों और धर्म का अपमान करना सिखाती है?

कई यूजर्स ने इस घटना की तुलना अन्य समुदायों के आयोजनों से करते हुए पूछा कि क्या वहां भी यह महिला इसी तरह चिल्लाने की हिम्मत दिखाती? स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं सोसायटियों में आपसी भाईचारे को खत्म कर रही हैं। महाशिवरात्रि एक ऐसा पर्व है जो करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है। ऐसे में एक सामूहिक आयोजन को रोकना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि यह सीधे तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। लोगों का कहना है कि अगर किसी को व्यक्तिगत समस्या थी, तो उसे शालीनता से बात करनी चाहिए थी, न कि भगवान के दरबार में इस तरह का तांडव करना चाहिए था।
Noida News: कानूनी कार्रवाई की उठी मांग
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने नोएडा पुलिस और प्रशासन से इस महिला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मांग की जा रही है कि धार्मिक कार्यों में जानबूझकर बाधा डालने और शांति भंग करने के आरोप में मामला दर्ज किया जाए। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सोसायटी प्रबंधन (AOA) ने इस पर क्या रुख अपनाया है।
Report BY: संजय कुमार
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