Operation Sindoor: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि देश के उत्तरी मोर्चे पर स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है, लेकिन इसके साथ ही निरंतर सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की संतुलित, सटीक और दृढ़ प्रतिक्रिया ने सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ देश की तैयारी, निर्णायक क्षमता और रणनीतिक स्पष्टता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है।
ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी
थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भविष्य में किसी भी तरह के दुस्साहस का सख्त जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमा पर शीर्ष स्तर की वार्ताओं, संपर्क की पुनर्बहाली और विश्वास-निर्माण उपायों के चलते हालात में धीरे-धीरे सामान्यीकरण हो रहा है, लेकिन सतर्कता में कोई कमी नहीं की जा रही है।
Operation Sindoor: बांग्लादेश के साथ संवाद के कई चैनल खुले
बांग्लादेश को लेकर जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने संवाद के लिए कई चैनल खोल रखे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी खुद बातचीत होती रहती है, जबकि नौसेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख भी संवाद कर चुके हैं। इसके अलावा भारतीय सेना का एक प्रतिनिधिमंडल भी वहां गया था, ताकि किसी भी प्रकार के मिसकम्युनिकेशन से बचा जा सके।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद निर्णायक फैसला
थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद उच्चतम स्तर पर निर्णायक प्रतिक्रिया का स्पष्ट निर्णय लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ऑपरेशन सिंदूर की परिकल्पना और क्रियान्वयन अत्यंत सटीकता के साथ किया गया।
Operation Sindoor: 22 मिनट की कार्रवाई, 88 घंटे का समन्वित अभियान
उन्होंने बताया कि 7 मई 2025 को 22 मिनट की तीव्र कार्रवाई और इसके बाद 10 मई तक चले 88 घंटे के समन्वित अभियान ने रणनीतिक मान्यताओं को पुनर्परिभाषित किया। इस दौरान आतंकी ढांचे पर गहरे प्रहार किए गए, नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और लंबे समय से जारी परमाणु धमकियों की बयानबाजी को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी किया गया।
पाक अधिकृत क्षेत्रों में अब भी सक्रिय आतंकी कैंप
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना की जानकारी में अब भी लगभग आठ आतंकी कैंप सक्रिय हैं। इनमें से दो अंतरराष्ट्रीय सीमा के सामने और छह नियंत्रण रेखा के सामने स्थित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना इन सभी पर कड़ी नजर रखे हुए है और किसी भी गतिविधि की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी।
Operation Sindoor: त्रि-सेवा समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण
थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर स्पष्ट राजनीतिक निर्देशों, सैन्य बलों को पूर्ण स्वतंत्रता और त्रि-सेवा समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने इस दौरान सीएपीएफ, खुफिया एजेंसियों, नागरिक निकायों, राज्य प्रशासन और गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय जैसे विभिन्न मंत्रालयों की भूमिका की सराहना की।
भविष्य के युद्ध राष्ट्रीय स्तर के समन्वय से लड़े जाएंगे
उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में विश्वभर में सशस्त्र संघर्षों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि जो राष्ट्र तैयार रहते हैं, वही अपने भविष्य को सुरक्षित कर पाते हैं। भारत में भविष्य के युद्ध किसी एक हथियार या एक सेवा से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के समन्वित प्रयास से जीते जाएंगे।
जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर
थल सेनाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के मंत्र – जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भविष्य की सैन्य रणनीति की नींव है। उन्होंने बताया कि पिछले 14–15 महीनों में संगठनात्मक बदलावों से जुड़े लगभग 31 सरकारी अनुमोदन दिए गए हैं, जिनमें एविएशन ब्रिगेड की स्थापना जैसे ऐतिहासिक निर्णय शामिल हैं।
सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आर्मी मेडिकल कोर और आर्मी एजुकेशन कोर में महिलाओं की भागीदारी को लेकर ठोस प्रगति हुई है। इसके साथ ही सेना में महिला स्काइडाइविंग दल का गठन किया गया है, जिसमें शामिल महिला जवान अब तक करीब 520 सफल जंप पूरे कर चुकी हैं। यह दल भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका, साहस और उत्कृष्ट प्रशिक्षण का प्रतीक बन चुका है।
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