PM Modi: रामकृष्ण परमहंस की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा दी गई श्रद्धांजलि के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं में रामकृष्ण परमहंस को विशेष रूप से ‘ठाकुर’ के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्होंने इसे प्रदेश की सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।
जयंती पर श्रद्धांजलि और उसके बाद विवाद
प्रधानमंत्री ने गुरुवार को रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए उनके आध्यात्मिक विचारों और मानवता के लिए दिए संदेशों को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस के उपदेश आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबोधन में प्रयुक्त शब्द बंगाल की पारंपरिक मान्यता से मेल नहीं खाते।
PM Modi: स्वामी शब्द पर उठे सवाल
ममता बनर्जी ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस को व्यापक रूप से ‘ठाकुर’ के रूप में जाना जाता है और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत में यही संबोधन प्रचलित है। उनके अनुसार, धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों के संदर्भ में स्थानीय परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को सांस्कृतिक संवेदनशीलता से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
PM Modi: रामकृष्ण परमहंस की विरासत
रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। वे दक्षिणेश्वर काली मंदिर से जुड़े रहे और विभिन्न धर्मों की एकता तथा आध्यात्मिक समन्वय का संदेश दिया। उनके विचारों से प्रेरित होकर रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की स्थापना हुई, जो आज भी शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।
सियासत और संस्कृति का संगम
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषय राजनीति के केंद्र में आ सकते हैं। जहां एक ओर प्रधानमंत्री ने संत की शिक्षाओं को देश के लिए प्रेरणादायक बताया, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का मुद्दा उठाया। फिलहाल यह बहस राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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