New Delhi News: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष चर्चा उस वक्त बेहद गर्म हो उठी, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर राजनीतिक लाभ उठाने के आरोपों में भिड़ गए। राष्ट्रीय गीत पर हुई यह चर्चा शुरुआत में ऐतिहासिक महत्व और सम्मान को समर्पित थी, लेकिन जल्द ही यह बहस चुनावी रणनीति, इतिहास की व्याख्या और राजनीतिक बयानबाज़ी का अखाड़ा बन गई।
New Delhi News: अमित शाह बोले— कांग्रेस ने वंदे मातरम् को कम महत्व दिया
गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान तीखे हमले करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कई बार “वंदे मातरम्” के महत्व को कमतर करके दिखाया, और यह रवैया स्वतंत्रता संग्राम की भावना के खिलाफ है। शाह ने कहा कि यह गीत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान और त्याग की कहानी है, जिसे राजनीति से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेताओं ने वर्षों तक राष्ट्रीय गीत को लेकर असहज रवैया अपनाया, जबकि यह देश की आत्मा का प्रतीक है। शाह के इस बयान ने सदन का माहौल और अधिक गरमा दिया। कांग्रेस के सांसदों ने तत्काल आपत्ति जताई और इसे “राजनीतिक हमला” बताया। विपक्ष ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा आगामी चुनावों, खासकर बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भावनात्मक मुद्दों को उछाल रही है।
खड़गे बोले कांग्रेस ने हमेशा वंदे मातरम् का सम्मान किया है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमित शाह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान “वंदे मातरम्” को अपनी आवाज़ और संघर्ष का प्रतीक बनाया था। उन्होंने कहा कि वह दौर ऐसा था जब यही गीत जन आंदोलनों में लोगों को एकजुट करता था, इसलिए यह कहना गलत है कि कांग्रेस ने कभी इसे कमतर दिखाया। खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार असली मुद्दों बेरोज़गारी, महंगाई और किसान संकट से ध्यान हटाने के लिए भावनात्मक विषयों को बड़ी बहस का रूप देती है। उनके अनुसार, “राष्ट्रीय गीत पर चर्चा जरूरी है, लेकिन उसके बहाने राजनीतिक लाभ उठाना राष्ट्रहित में नहीं।”
New Delhi News: चुनाव के बीच बढ़ती बहस और संसद में बढ़ता तनाव
जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ती गई, बहस का स्वर और तकरार दोनों तेज़ होते गए। विपक्ष ने कहा कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव को देखते हुए “वंदे मातरम्” को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। इस पर सत्ता पक्ष का जवाब था कि राष्ट्रीय गीत किसी चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि देश के सांस्कृतिक गर्व और एकता का प्रतीक है।सदन में मौजूद कई नेताओं ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी को “वंदे मातरम्” के संघर्ष, उसकी पृष्ठभूमि और उसके महत्व से परिचित कराना बेहद ज़रूरी है। लेकिन यह चर्चा जिस तरह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई, उससे संसद का माहौल पूरे दिन गर्म रहा।







