Port: भारत के समुद्री इतिहास में एक अहम कदम जुड़ गया है। Adani Ports and Special Economic Zone Limited (APSEZ) ने देश का पहला “Port of Refuge” शुरू करने का ऐलान किया है। इसके लिए कंपनी ने SMIT Salvage और Maritime Emergency Response Centre (MERC) के साथ समझौता किया है। कंपनी ने इसकी जानकारी एक्सचेंज फाइलिंग में दी। इस पहल से भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, जहाजों को आपात स्थिति में मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
पोर्ट ऑफ रिफ्यूज क्या होता है?
International Maritime Organization के अनुसार, Port of Refuge ऐसी सुरक्षित जगह होती है जहां कोई भी जहाज खतरे या संकट की स्थिति में आकर रुक सकता है। यहां जहाज की मरम्मत, माल की सुरक्षा और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। आसान भाषा में समझें तो ये समुद्र में चल रहे जहाजों के लिए एक “इमरजेंसी पिटस्टॉप” जैसा होता है। अगर जहाज में आग लग जाए, स्ट्रक्चर को नुकसान हो या कार्गो में गड़बड़ी हो, तो ऐसी जगहें बड़े हादसों को टालने में मदद करती हैं।
Port: कहां होंगे ये पोर्ट?
APSEZ ने दो जगहों को Port of Refuge के तौर पर चुना है: पश्चिमी तट पर दिघी पोर्ट, जो अरब सागर और खाड़ी की दिशा में आने-जाने वाले जहाजों के लिए अहम रहेगा पूर्वी तट पर गोपालपुर पोर्ट, जो बंगाल की खाड़ी और मलक्का रूट की ओर जाने वाले जहाजों को सपोर्ट करेगा ये दोनों लोकेशन दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों के करीब हैं, इसलिए इनकी रणनीतिक अहमियत काफी ज्यादा है।
Port: क्या-क्या मिलेगी सुविधा?
इन पोर्ट्स पर जहाजों को हर तरह की इमरजेंसी मदद दी जाएगी, जैसे: जहाज को सुरक्षित बचाना, डूबे जहाज को हटाना, आग बुझाना, समुद्री प्रदूषण को रोकना, तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन, इसके लिए खास उपकरण और ट्रेनिंग प्राप्त टीमें तैनात रहेंगी।
क्यों है ये अहम?
Port: भारत के पास करीब 11,000 किमी लंबी तटरेखा है, लेकिन अब तक Port of Refuge की औपचारिक व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में ये पहल न सिर्फ समुद्री सुरक्षा बढ़ाएगी बल्कि भारत की वैश्विक शिपिंग नेटवर्क में भूमिका को भी मजबूत करेगी।
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