Postal Fraud Case: डाक विभाग में हुई एक बड़ी वित्तीय अनियमितता के मामले में भोपाल की विशेष सीबीआई अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने 13.85 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में ग्वालियर के लश्कर हेड पोस्ट ऑफिस में पदस्थ रहे पूर्व पोस्टल असिस्टेंट रजनीश तिवारी को दोषी करार देते हुए पांच साल की सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी पर 14 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए डाकघर के खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात किया।
Postal Fraud Case: कैसे सामने आया मामला
सीबीआई की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह मामला 20 अप्रैल 2022 को दर्ज किया गया था। ग्वालियर के वरिष्ठ अधीक्षक डाकघर ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 के दौरान लश्कर हेड पोस्ट ऑफिस में कार्यरत रहते हुए रजनीश तिवारी ने वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया।
Postal Fraud Case: तकनीकी सिस्टम से की गई छेड़छाड़
जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने डाकघर के फिनैकल इंटरनेट मॉड्यूल में तकनीकी हेरफेर की। उसने 17 ग्राहकों के आवर्ती जमा (आरडी) खातों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर कुल 13,85,496 रुपये की राशि अवैध रूप से ट्रांसफर कर ली।
सीबीआई के अनुसार, यह रकम तीन नियमित और बचत खातों में स्थानांतरित की गई थी, जिन्हें नियमों को नजरअंदाज कर खोला गया था। इनमें से दो खाते आरोपी के स्वयं के या संयुक्त नाम पर पाए गए।
चोरी के एटीएम कार्ड से निकाली रकम
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने लश्कर हेड पोस्ट ऑफिस से चोरी किए गए एटीएम कार्ड का उपयोग कर इन खातों से नकदी निकाली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि धोखाधड़ी पूरी तरह सुनियोजित तरीके से की गई थी।
मजबूत साक्ष्यों पर टिका फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। यह फैसला सरकारी संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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