Prayagraj News: प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में अहम निर्देश जारी करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगियों के खिलाफ नाबालिग बच्चों के कथित यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह फैसला शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका और प्रस्तुत किए गए बयानों को सुनने के बाद दिया।यह मामला माघ मेला क्षेत्र और कथित तौर पर गुरुकुल व शिविरों में बच्चों के साथ हुई घटनाओं से जुड़ा बताया जा रहा है। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों को देखने के बाद प्रथम दृष्टया मामला दर्ज कर जांच जरूरी मानते हुए आदेश पारित किया।
कौन हैं शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी?
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का संबंध शामली जिले के कांधला क्षेत्र से बताया जाता है। वे एक धार्मिक संस्था और प्राचीन मंदिर समिति से जुड़े रहे हैं और सन्यास जीवन अपना चुके हैं। शिकायतकर्ता ने अदालत में कहा कि उन्हें पहले प्रशासन से राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतें करने के बाद उन्हें धमकियां मिलीं और कार्रवाई न होने पर मजबूर होकर कोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी।
Prayagraj News: कोर्ट में क्या हुआ?
8 फरवरी को दायर शिकायत पर सुनवाई करते हुए विशेष पॉक्सो न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कुछ अहम कदम उठाए।अदालत ने बच्चों के बयान दर्ज करने के लिए कोर्ट रूम खाली कराया।केवल वकीलों की मौजूदगी में नाबालिगों के बयान रिकॉर्ड किए गए।बच्चों ने बंद कमरे में अपने साथ हुई कथित घटनाओं का विवरण दिया, जिसे कैमरे में रिकॉर्ड भी किया गया।इसके बाद अदालत ने मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद आदेश जारी किया।
Prayagraj News: आरोप क्या हैं?
शिकायत में कहा गया है कि कुछ शिविरों और गुरुकुलों में नाबालिग बच्चों को रखा जाता था और उनसे निजी काम करवाए जाते थे। आरोप है कि बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार और यौन शोषण जैसी घटनाएं हुईं।इसके अलावा फर्जी लेटरहेड और दस्तावेजों के जरिए प्रशासन को गुमराह करने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने अदालत से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
Prayagraj News: आरोपी पक्ष का क्या कहना है?
दूसरी ओर, शंकराचार्य पक्ष के वकीलों ने अदालत में आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया जाए। उनका कहना है कि वे न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं और कोर्ट के सामने अपने पक्ष में सभी प्रमाण रखेंगे।कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस को मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ानी होगी। जांच के दौरान बच्चों के बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच कानून के दायरे में और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
पहले प्रशासन से की गई थीं शिकायतें
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने जनवरी में स्थानीय थाने और पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत में याचिका दायर की। कोर्ट में पेशी के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और सुरक्षा की जरूरत है।अब यह मामला पुलिस जांच के चरण में है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपों की सच्चाई, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अदालत ने संकेत दिया है कि बच्चों के अधिकार और सुरक्षा सर्वोपरि हैं और मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।प्रयागराज की पॉक्सो अदालत के इस आदेश ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी। फिलहाल अदालत ने प्रथम दृष्टया जांच जरूरी मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है, जिससे पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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