Putin Visit India: देश से प्रतिभाएं अक्सर विदेशों में पढ़लिख कर भाग जाती हैं। देश को तो नुकसान होता ही है। अमेरिका में अधिकांश भारतीय बड़े बड़े पदों पर काम कर रहे हैं। इस बात को अमेरिका समझता है, लेकिन हाल ही में अमेरिका के राष़्टपति ने अपनी विदेश नीति में परिवर्तन कर भारत के प्रतिभावान छात्रों पर एक तरह से रोक लगा दी है। उनका मानना है कि अमेरिकी नागरिक ही देश में काम करें, लेकिन अब अमेरिकी राष्टपति को ही अहसास हो रहा है कि इस तरह से विदेशी प्रतिभावों को रोकना अमेरिका के विकास को मंद करना है।
भारत पर आर्थिक दबाव डालने की कोशिश कर रहा अमेरिका
मामला भारत का रूस के साथ अच्छे संबेघों को देखते हुए है। अमेरिका किसी न किसी तरह से भारत पर ऐसे आर्थिक दबाव डालने की कोशिश कर रहा है। जिससे आज की तारीख में भारत के रुपये में भारी गिरावट आई है, एक डालर के मुकाबले रुपये की कीमत 90 रुपये हो चुकी है। इसका सिलसिला तब से शुरू हुआ है, जब से टंप ने 2 अप्रैल से भारत के खिलाफ टेरेफ बढाया है। अप्रैल से आज तक 5.5 फीसदी रुपये की कीमत गिरी है। यह अमेरिका ने भारत के खिलाफ आर्थिक लड़ाई छेड़ रखी है, यह भारत की बांह मरोड़ने जैसा है। अमेरिका का राटपति नहीं चाहता है कि भारत रूस से दोस्ती करे।
Putin Visit India: भारत कभी विकसित देशों की कठपुतलि नहीं
यूक्रेन और रूस की लड़ाई में अमेरिका ने रूस पर बहुत सारे दबाव डाले हैं, जिसमें रूस के तेल को पश्चिमी देशों को न बेचने का उसका आर्थिेक मुद्दों में से एक था, पर इसमें अमेरिका सफल नहीं हुआ, क्योंकि भारत ने रूस के तेल को बेचने में जबर्दस्त सहायता की। इस कारण अमेरिका की कुदृष्टि भारत के विकास में बाधा डालने की साजिशों में से एक है। भारत कभी गुटनिरपेक्ष देशों का अगुवा था। रूस और अमेरिका के खेमे से बाहर रहा कर अपना विकाश भारत करता था। यह भारत की विदेश नीति का अग्रणी हिस्सा था। भारत कभी विकसित देशों की कठपुतलि नहीं रहा और न रहना चाहता है।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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