Rafel vs J-10CE Jet: भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संतुलन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। पाकिस्तान अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए चीन से 60 से 70 Chengdu J-10CE लड़ाकू विमानों का बड़ा ऑर्डर देने की तैयारी में है। अगर यह सौदा पूरा होता है, तो पाकिस्तान के पास इन विमानों की कुल संख्या करीब 100 तक पहुंच सकती है।
भारत के राफेल को जवाब देने की कोशिश
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान का यह कदम भारत के आधुनिक राफेल फाइटर जेट बेड़े का मुकाबला करने के लिए उठाया जा रहा है। खासतौर पर हाल के सैन्य घटनाक्रमों के बाद पाकिस्तान ने अपनी एयर पावर बढ़ाने पर जोर दिया है।
Rafel vs J-10CE Jet: रणनीति में बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए ‘स्टैंड-ऑफ वॉरफेयर’ पर फोकस कर रहा है। इसका मतलब है कि वह सीधे आमने-सामने की लड़ाई के बजाय लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता बढ़ा रहा है। J-10CE में लगी BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) मिसाइलें और AESA रडार इसे इस रणनीति के लिए बेहद अहम बनाते हैं।
J-10CE की ताकत
चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित J-10CE एक सिंगल इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है। यह 4.5+ जेनरेशन का विमान है, जिसकी अधिकतम रफ्तार करीब मैक 1.8 है। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, उन्नत रडार सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें लगी होती हैं। पाकिस्तान ने इसे 2022 में अपनी वायुसेना में शामिल किया था और फिलहाल उसके पास करीब 20 ऐसे विमान हैं।
Rafel vs J-10CE Jet: राफेल की खासियत
वहीं भारत का राफेल एक ट्विन इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो अपनी उच्च तकनीक, मजबूत सेंसर और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के लिए जाना जाता है। यह करीब 2200 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और छोटे रनवे से भी ऑपरेट करने की क्षमता रखता है। इसकी मल्टी-रोल क्षमता इसे हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन में बेहद प्रभावी बनाती है।
क्षेत्रीय संतुलन पर असर
अगर पाकिस्तान यह डील पूरी कर लेता है, तो दक्षिण एशिया में हवाई ताकत का संतुलन कुछ हद तक बदल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के पास तकनीक, ट्रेनिंग और विविध लड़ाकू बेड़े के चलते अभी भी बढ़त बनी हुई है।
Rafel vs J-10CE Jet: बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा
भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच यह सौदा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दोनों देशों की वायुसेनाएं अपनी-अपनी क्षमताओं को किस तरह और मजबूत करती हैं।







