Railway: अगर आप ट्रेन से सफर करते समय स्टेशन या कोच के अंदर-बाहर लगे विज्ञापनों पर नजर डालते हैं, तो अब आपको बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रेल ने विज्ञापनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है और साफ कर दिया है कि कुछ तरह के एड अब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसका मकसद यात्रियों को एक सुरक्षित और बेहतर माहौल देना है।
कैसे कमाता है रेलवे विज्ञापनों से पैसा
रेलवे सिर्फ टिकट से ही नहीं, बल्कि विज्ञापन और ब्रांडिंग से भी अच्छी कमाई करता है। स्टेशनों के सर्कुलेटिंग एरिया, डिजिटल स्क्रीन और ट्रेनों के अंदर-बाहर कंपनियों को एड लगाने की सुविधा दी जाती है। इससे होने वाली कमाई को रेलवे “संड्री रेवेन्यू” के रूप में जोड़ता है।
Railway: इन विज्ञापनों पर पूरी तरह बैन
रेलवे ने कुछ कैटेगरी के विज्ञापनों को पूरी तरह बैन कर दिया है। इनमें शामिल हैं: शराब से जुड़े विज्ञापन, सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू उत्पाद, अश्लील या आपत्तिजनक कंटेंट वाले एड, दूसरे ट्रांसपोर्ट साधनों के प्रमोशनल विज्ञापन, रेलवे हादसों से जुड़ी निजी बीमा पॉलिसी के एड। इन नियमों का पालन हर विज्ञापन एजेंसी के लिए जरूरी होगा।
Railway: कैसे मिलता है विज्ञापन का ठेका
रेलवे में विज्ञापन के कॉन्ट्रैक्ट ई-नीलामी के जरिए दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होती है, जहां वही एजेंसी चुनी जाती है जो सभी नियमों और शर्तों को पूरा करती है।
विज्ञापन लगाने से पहले लेनी होगी अनुमति
Railway: ट्रेनों या स्टेशनों पर कोई भी विज्ञापन लगाने से पहले संबंधित रेलवे डिविजन से मंजूरी लेना जरूरी है। एजेंसी ब्रांड चुन सकती है, लेकिन उसे केंद्र और राज्य के सभी कानूनों का पालन करना होगा। रेलवे ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी और आपत्तिजनक विज्ञापन हटाए जाएंगे।
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