Rajnath Singh: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान “मैरीटाइम कॉन्क्लेव सागर संकल्प” में कहा कि जो राष्ट्र अपने अतीत से सीखता है, वही भविष्य में मजबूती और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने भारतीय समुद्री इतिहास और वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला।
समुद्री क्षेत्र: सुरक्षा और आर्थिक आधार
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत कई शताब्दियों से समुद्री व्यापार और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। रोमन साम्राज्य, मेसोपोटामिया, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारतीय समुद्री यात्री और व्यापारी पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज समुद्री क्षेत्र सिर्फ व्यापार या नौसैनिक ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक स्वतंत्रता का आधार बन चुका है।
Rajnath Singh: आत्मनिर्भरता और रक्षा उत्पादन
केंद्रीय मंत्री ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन अब घरेलू शिपयार्ड और निजी उद्योगों के सहयोग से तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर भारतीय नौसेना और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल कर रहे हैं।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का सहयोग
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.5 लाख करोड़ और डिफेंस एक्सपोर्ट ₹24,000 करोड़ तक पहुंच चुका है। सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब भारतीय शिपयार्ड में डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण के साथ तैयार की जा रही हैं।
Rajnath Singh: आत्मनिर्भरता एक नारा नहीं बल्कि हकीकत बन चुकी
राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल एक नारा नहीं बल्कि व्यावहारिक हकीकत बन चुकी है। भारत तेजी से “बिल्डर्स नेवी” के रूप में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। उन्होंने निजी उद्योगों के योगदान की सराहना की और कहा कि ये कदम देश की सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को और मजबूत बनाएंगे।
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