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‘बेटे के सपनों के लिए कंधों पर ढोए थे सिलेंडर, पढ़े रिंकू सिंह के पिता की संघर्ष से लिखी सफलता की ये कहानी…

क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन

Rinku Singh: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात निधन हो गया। उन्होंने 27 फरवरी की सुबह ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल के दिनों में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई दिनों तक वे मैकेनिकल वेंटिलेटर पर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन आखिरकार शुक्रवार तड़के उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

संघर्ष से सफलता तक: एक पिता की कहानी

रिंकू सिंह की चमकदार सफलता के पीछे उनके पिता का अथाह संघर्ष और त्याग छिपा है। खानचंद्र सिंह एक बेहद साधारण परिवार से थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया। वह घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे। महीने में महज 7-8 हजार रुपये की आय से परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं था। दो कमरों के छोटे से घर में पूरा परिवार रहता था। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेट के जुनून को पंख दिए।

रिंकू ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दिनों में पिता उनके क्रिकेट खेलने के फैसले से खुश नहीं थे। साल 2012 में क्रिकेट को लेकर उन्हें पिता की डांट और मार भी झेलनी पड़ी। लेकिन उसी साल एक टूर्नामेंट में बाइक इनाम जीतने के बाद पिता का नजरिया बदल गया। बेटे की लगन देख उन्होंने पूरा साथ देने का फैसला किया। बताया जाता है कि उसी इनामी बाइक का इस्तेमाल कर खानचंद्र सिंह ने सिलेंडर डिलीवरी का काम और मजबूती से शुरू किया। परिवार के अन्य सदस्य भी जिम्मेदारियां निभाते रहे, एक भाई ऑटो चलाते हैं, जबकि दूसरे कोचिंग संस्थान में कार्यरत हैं।

अलीगढ़ के घर-घर जाकर पहुंचाते थे सिलेंडर, बेटे को बनाया कामयाब, रिंकू सिंह  के पिता ने किया बड़ा संघर्ष - cricketer rinku singh father khanchand singh  worked as cylinder ...

Rinku Singh: बुलंदशहर से अलीगढ़ तक का सफर

परिवार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के दानपुर गांव का रहने वाला है। करीब 25 साल पहले रोजगार की तलाश में परिवार अलीगढ़ आकर बस गया। आर्थिक हालात इतने कमजोर थे कि एक समय रिंकू को सफाई कर्मचारी की नौकरी तक करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने सिर्फ एक दिन बाद ही वह काम छोड़ दिया और क्रिकेट पर पूरा ध्यान लगाने का फैसला किया।

जब बदली किस्मत

रिंकू की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें आईपीएल में 55 लाख रुपये में खरीदा। इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ पांच गेंदों पर लगातार पांच छक्के लगाकर उन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। बाद में केकेआर ने उन्हें 13 करोड़ रुपये में रिटेन किया।

एक समय ऐसा भी था जब खानचंद्र सिंह करीब 5 लाख रुपये के कर्ज में डूब गए थे। उस दौर में रिंकू ने क्रिकेट से मिलने वाले डेली अलाउंस तक बचाकर पिता की मदद की। सफलता मिलने के बाद उन्होंने पिता को साढ़े तीन करोड़ रुपये की आलीशान कोठी और एक महंगी कावासाकी बाइक तोहफे में दी। आज वही पिता, जिन्होंने बेटे के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया, इस दुनिया में नहीं रहे। खानचंद्र सिंह के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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