Russian Oil: खबरे हैं कि रूस से हमें पहले सस्ते दामों में तेल देता था। अब वह सुबिधा नहीं मिल पायेगी। हालांकि अमेरिका के अनुसार 30 दिन तक तेल मिलेगा। यह भी अपने आपमें अजीब बात है कि तेल देने के लिए अमेरिका अपनी शर्तों को रख रहा है। यह भारत के सम्मान के लिए उचित नहीं है। भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है, उसकी अपनी संप्रभुता है। उसे अमेरिका के इशारे से नहीं चलाया जा सकता है। यह भारत के नागरिकों का अपमान है। इस पर भारत सरकार को अमेरिका की शर्तों पर नहीं चलना चाहिए। दूसरी तरफ देखिए-ईरान मध्य-पूर्व में अपनी स्वततंत्रता को बरकरार रखने के लिए अमेरिका को सबक दे रहा है, चाहे परिणाम कुछ भी हों, पर अपने देश के अस्तित्त्व को किसी दूसरे देश के हाथों गिरवी रखने को तैयार नहीं है। यह एक सबक है।
भारत किसी भी खेमे का मोहताज नहीं रहा
भारत को भी अमेरिका की शर्तों पर कोई भी सौदा नहीं करना चाहिए। हाल ही में टैरिफ पर अमेरिका का मनमाना दबाव किसी भी तरह से भारत के सम्मान के योग्य नहीं है। स्वयं जब उनकी ही अदालत इस बात को नहीं स्वीकारती, तब हम पर राष्ट्रपति ट्रंप की किस बात की धौंस है। भारत शुरू से ही अपनी विदेश नीति में सीधे तन के चला है। भारत ने दाहिना और बाऐं खेमे दोनो को साथ लेकर चला है। वह किसी खेमे का मोहताज नहीं रहा। रूस के साथ भारत के संबंध समानता के आधार पर रहे हैं। आजादी मिलने के समय देश की अर्थव्यवस्ता इतनी अनुकूल नहीं थी, फिर भी अपने संसाधनों से देश ने प्रगति का रास्ता स्वयं चुना। पंचवर्षीय योजनाओं के साथ देश प्रगति की राह पर चला। इसने आत्मनिर्भर होने में बहुत बड़ा योगदान दिया। कृषि से लेकर विभिन्न टैक्नोलाजी का इजाद भी देश करता रहा। इस तरह भारत ने अपने रास्ते स्वयं बनाये। फिर हमें अमेरिका से डिक्टेट होने की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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