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तकनीकी खराबी के बाद ईरानी जहाज को कोच्चि में डॉकिंग इंसानियत के आधार पर दी : जयशंकर

S. Jaishankar said: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कोच्चि में ईरानी नौसेना के जहाज को डॉकिंग की अनुमति देने के भारत के फैसले को मानवीय आधार पर लिया गया कदम बताया है। नई दिल्ली में आयोजित रायसीना संवाद 2026 के 11वें संस्करण के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि यह जहाज क्षेत्रीय हालात के कारण मुश्किल स्थिति में फंस गया था।

ईरान ने भारत से मांगी थी मदद

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत को ईरान की ओर से उसके नौसेना के जहाज आईरिस लवन के लिए सहायता का अनुरोध मिला था। जहाज ने अपने ऑपरेशन के दौरान तकनीकी खराबी की सूचना दी और सुरक्षित रूप से बंदरगाह तक पहुंचने के लिए भारत से मदद मांगी थी।

S. Jaishankar said: इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में लिया था हिस्सा

बताया गया कि आईआरआईएस लवन ने पिछले महीने आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लिया था। तकनीकी समस्या आने के बाद जहाज कोच्चि की ओर रवाना हुआ। सरकारी सूत्रों के मुताबिक श्रीलंका के दक्षिण में ईरानी फ्रिगेट आईरिस देना से जुड़ी घटना से कई दिन पहले ही ईरान ने भारत से संपर्क कर लिया था।

मिलन 2026 नौसैनिक अभ्यास का था हिस्सा

यह जहाज मिलान 2026 नौसेना अभ्यास और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए क्षेत्र में तैनात ईरानी नौसेना के बेड़े का हिस्सा था। यह अभ्यास 15 फरवरी से 25 फरवरी के बीच आयोजित किया गया था। तकनीकी खराबी की जानकारी मिलने के बाद भारत ने 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति दे दी।

S. Jaishankar said: 183 क्रू सदस्य कोच्चि में ठहरे

अनुमति मिलने के बाद जहाज कोच्चि पहुंचा, जहां उसके 183 क्रू सदस्य फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। जयशंकर ने कहा कि जब ईरान की ओर से मदद का अनुरोध आया तो भारत ने इसे पूरी तरह मानवीय दृष्टिकोण से देखा।

मानवीय आधार पर लिया गया फैसला

विदेश मंत्री ने कहा कि जहाज में कई युवा कैडेट भी मौजूद थे और वे अचानक बदली परिस्थितियों में फंस गए थे। उन्होंने कहा, “हमें ईरानी पक्ष से संदेश मिला कि एक जहाज, जो हमारी सीमा के करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। उसे तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं, इसलिए हमने 1 मार्च को उसे आने की अनुमति दे दी।”

S. Jaishankar said: ईरानी फ्रिगेट पर हमले की घटना

इस बीच 4 मार्च को ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना श्रीलंका के गाले तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में यात्रा के दौरान टॉरपीडो हमले की चपेट में आ गया। श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार जहाज के डूबने के बाद समुद्र से 87 शव बरामद किए गए, जबकि 32 नाविकों को जिंदा बचा लिया गया। बाद में अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी इस घटना की पुष्टि की।

हिंद महासागर की रणनीतिक स्थिति पर टिप्पणी

इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति पर सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अक्सर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं, लेकिन लोगों को हिंद महासागर क्षेत्र की वास्तविक रणनीतिक स्थिति को भी समझना चाहिए।

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