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धर्म से ऊपर इंसानियत: देवबंद में मुस्लिम पड़ोसियों ने हिंदू युवक की अंतिम विदाई निभाई, पूरे विधि-विधान से किया संस्कार

Saharanpur News

Saharanpur News: एक ओर जहां देश-दुनिया में नफरत और हिंसा की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के देवबंद से सांप्रदायिक सौहार्द और इंसानियत की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। देवबंद की कोला बस्ती से आई यह तस्वीर बताती है कि मजहब से ऊपर इंसानियत आज भी जिंदा है।

पूरे देश के लिए बना मिसाल

कोला बस्ती, जो कि मुस्लिम बहुल इलाका है, वहां पिछले करीब 20 वर्षों से सैनी समाज का एक हिंदू परिवार रह रहा था। हाल ही में परिवार के युवक अजय की बीमारी के चलते असमय मृत्यु हो गई। इस दुखद घड़ी में परिवार बेहद टूट गया और खुद को अकेला महसूस करने लगा, लेकिन तभी मुस्लिम पड़ोसियों ने आगे बढ़कर जो किया, वह आज पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया। युवक की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से जुड़ी तमाम जिम्मेदारियां मुस्लिम पड़ोसियों ने अपने कंधों पर उठा लीं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में अर्थी बांधते हुए नजर आ रहे गुलफाम अंसारी ने बताया कि मोहल्ले में लगभग 100 प्रतिशत मुस्लिम परिवार रहते हैं और वही एकमात्र हिंदू परिवार था।

Saharanpur News: सांप्रदायिक सौहार्द की एक मजबूत मिसाल

गुलफाम अंसारी के अनुसार, अजय भाई हमारे साथ पिछले 20 सालों से रह रहे थे। उनके इंतकाल के बाद जो भी व्यवस्था हुई, वह हमने ही कराई। हमें हिंदू धर्म की रीति-रिवाजों की पूरी जानकारी नहीं थी, इसलिए परिवार के लोगों से पूछ-पूछकर अर्थी बांधने से लेकर बाकी सभी रस्में निभाईं। उन्होंने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता था कि हिंदू परंपरा के अनुसार मृत्यु के बाद तीन दिन तक घर में खाना नहीं बनता। ऐसे में मृतक के घर में मौजूद तीन बहनों, एक बेटे और बुजुर्ग मां के लिए तीन दिनों तक खाने-पीने का पूरा इंतजाम मोहल्ले के लोगों ने किया। इसके साथ ही बाहर से आने वाले रिश्तेदारों और मेहमानों के ठहरने के लिए रजाई-गद्दे और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी मुस्लिम पड़ोसियों ने खुद कीं।

यह पूरी घटना आज के दौर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आई है। जब समाज में नफरत फैलाने वाली खबरें ज्यादा सुनने को मिल रही हैं, तब देवबंद की यह कहानी यह याद दिलाती है कि भारत की असली ताकत आपसी भाईचारे और इंसानियत में ही है। देवबंद की कोला बस्ती से आई यह “मोहब्बत की तस्वीर” न सिर्फ दिल को सुकून देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि मुश्किल वक्त में मजहब नहीं, इंसानियत सबसे बड़ा धर्म होती है।

Report By: Deepak Tiwari

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