Samrat Samprati Museum: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भगवान महावीर जयंती के अवसर पर गांधीनगर के कोबा तीर्थ स्थित सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने किया।
संग्रहालय के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी विभिन्न दीर्घाओं का दौरा किया और यहां लगाई गई प्रदर्शनी को देखा। इन प्रदर्शनों में बारीकी से तराशी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, बड़े तीर्थ पट्टा और यंत्र पट्टा, लघु चित्रकला, चांदी के रथ, पुराने सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं।

2000 से अधिक दुर्लभ कलाकृतियों का प्रदर्शन
अधिकारियों के अनुसार, संग्रहालय के विशाल हॉल में 2000 से ज्यादा दुर्लभ और ऐतिहासिक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। ये सभी वस्तुएं जैन दर्शन, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी सदियों पुरानी धरोहरों का हिस्सा हैं। संग्रहालय की गैलरियों को इस तरह तैयार किया गया है कि पारंपरिक प्रदर्शनों के साथ आधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों को जानकारी प्राप्त करने का एक रोचक और गहरा अनुभव मिलता है।
Samrat Samprati Museum: जैन धर्म की विरासत को समझने का अवसर
अधिकारियों का कहना है कि यह संग्रहालय जैन धर्म की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाने के लिए बनाया गया है। इसके माध्यम से आगंतुक यह समझ सकेंगे कि समय के साथ जैन धर्म का विकास किस तरह हुआ और इसका समाज व संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ा।
इस संग्रहालय का नाम सम्राट संप्रति के नाम पर रखा गया है, जो सम्राट अशोक के पौत्र माने जाते हैं। जैन परंपरा में सम्र्राट संप्रति को अहिंसा के प्रति समर्पण और जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। इसलिए यह संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सामने लाने का काम करता है।

सात खंडों में भारत की सभ्यता और परंपरा की झलक
महावीर जैन आराधना केंद्र परिसर में बने इस संग्रहालय को सात अलग-अलग खंडों में विभाजित किया गया है। हर खंड भारत की सभ्यता और परंपराओं से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को दर्शाता है। यहां आने वाले लोगों को सदियों पुराने ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं की एक विस्तृत यात्रा देखने का अवसर मिलता है।
संग्रहालय में पारंपरिक प्रदर्शनों के साथ आधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल तकनीकों को भी जोड़ा गया है, जिससे इसे देखने का अनुभव और अधिक आकर्षक और जानकारीपूर्ण बन जाता है। यहां आने वाले पर्यटक, शोधकर्ता और विद्वान जैन धर्म से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से समझ सकते हैं।
Samrat Samprati Museum: सात भव्य दीर्घाओं में सजी ऐतिहासिक धरोहर
इस संग्रहालय में सदियों पुराने दुर्लभ अवशेषों, जैन कलाकृतियों और पारंपरिक विरासत से जुड़ी वस्तुओं को सुरक्षित रखा गया है और प्रदर्शित भी किया गया है। इनमें बारीक नक्काशी वाली पत्थर और धातु की मूर्तियां, बड़े तीर्थ पट्टा और यंत्र पट्टा, लघु चित्रकला, चांदी के रथ, प्राचीन सिक्के और पुरानी पांडुलिपियां शामिल हैं। इन सभी को सात भव्य दीर्घाओं में सजाया गया है।
दो हजार से अधिक दुर्लभ वस्तुओं से सजे विशाल कक्षों वाला यह संग्रहालय आगंतुकों को जैन धर्म के विकास की क्रमबद्ध जानकारी देता है। साथ ही यह भी समझने का अवसर देता है कि जैन धर्म ने भारतीय संस्कृति और समाज को किस तरह गहराई से प्रभावित किया है।







