Sanand Semiconductor Plant: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात के साणंद में एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) प्लांट का उद्घाटन करेंगे। यह उद्घाटन राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के तहत भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह प्लांट माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित किया गया है। इसे 22,516 करोड़ रुपये के बड़े निवेश से तैयार किया गया है। यहां सॉलिड स्टेट ड्राइव (एसएसडी), रैम श्रेणी के डीआरएएम और नैंड जैसे सेमीकंडक्टर मेमोरी उत्पादों की असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग की जाएगी। इन उत्पादों को वैश्विक बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
2,000 से 5,000 रोजगार बढ़ेंगे
अधिकारियों के अनुसार, इस समय प्लांट में लगभग 2,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। आने वाले समय में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर करीब 5,000 तक पहुंचाने की योजना है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी ने यह भी बताया कि इस संयंत्र में दिव्यांगजनों को भी ऑपरेटर और टेक्नीशियन के रूप में काम करने का अवसर दिया गया है। कुशल और प्रशिक्षित लोगों के लिए यहां अच्छे अवसर उपलब्ध हैं।
यह परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी की गई है। राज्य सरकार का कहना है कि गुजरात अब भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है।

Sanand Semiconductor Plant: एआई युग में मेमोरी बेहद जरूरी
माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष और सीईओ संजय मेहरोत्रा ने कहा कि आज के तकनीकी दौर में मेमोरी और स्टोरेज की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में। उनका कहना है कि मजबूत मेमोरी और स्टोरेज सपोर्ट के बिना एआई सिस्टम ठीक तरह से काम नहीं कर सकते। जैसे-जैसे एआई का उपयोग तेज गति और रियल-टाइम प्रतिक्रिया के लिए बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उन्नत मेमोरी समाधान की जरूरत भी बढ़ती जा रही है।
एटीएमपी प्लांट में सेमीकंडक्टर निर्माण की प्रक्रिया रेत से शुरू होती है। रेत से शुद्ध सिलिकॉन निकाला जाता है। इस सिलिकॉन को पिघलाकर लंबा बेलनाकार आकार दिया जाता है, जिसे इंगट कहा जाता है। बाद में इन इंगट्स को पतली वेफर में काटा जाता है।
वेफर से चिप तक पूरी प्रक्रिया
फेब्रिकेशन प्लांट में इन वेफर पर विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया के जरिए कई परतें चढ़ाई जाती हैं, जिससे ट्रांजिस्टर बनते हैं और मेमोरी संरचना तैयार होती है। इसके बाद वेफर को अलग-अलग चिप्स में काट दिया जाता है।
इन चिप्स को साणंद स्थित एटीएमपी प्लांट में भेजा जाता है। यहां इनकी असेंबली की जाती है और फिर सख्त गुणवत्ता परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के दौरान चिप की स्पीड, मेमोरी क्षमता और उसकी विश्वसनीयता को परखा जाता है। सभी जांच पूरी होने के बाद चिप पर आवश्यक जानकारी दर्ज की जाती है। फिर उन्हें पैक कर बाजार में भेजने के लिए तैयार किया जाता है।
वैश्विक बाजार हेतु उन्नत मेमोरी निर्माण
साणंद का यह प्लांट कंपनी की दुनिया भर में मौजूद इकाइयों में तैयार किए गए उन्नत डीआरएएम और नैंड वेफर को प्रोसेस करेगा और उन्हें तैयार मेमोरी उत्पादों में बदलेगा।
कंपनी का कहना है कि यहां तैयार होने वाला उत्पादन अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को पूरा करेगा। साथ ही, यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले मेमोरी और स्टोरेज समाधान की बढ़ती मांग को भी पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।






