SCB Hospital Fire: कटक स्थित श्रीराम चंद्र भंज (SCB) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग लगने की घटना के दो दिन बाद ओडिशा सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें अग्निशमन विभाग के तीन अधिकारी और विद्युत विभाग का एक अधिकारी शामिल है।
BJD ने उठाए सवाल, कहा-सिर्फ औपचारिक कदम
इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती का कहना है कि केवल जूनियर स्तर के अधिकारियों को सस्पेंड करना महज दिखावे की कार्रवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील मामले में राज्य सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई और लापरवाही बरती है।

SCB Hospital Fire: आधी रात को लगी आग, 12 लोगों की गई जान
यह घटना 14-15 मार्च की दरमियानी रात करीब 3 बजे हुई, जब अस्पताल में अचानक आग भड़क उठी। इस हादसे में अब तक 12 मरीजों की मौत हो चुकी है।
- 7 मरीजों की मौके पर ही मौत हो गई
- 5 मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ा
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई है।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि ICU में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
एक मृतक के भाई ने बताया कि अगर समय रहते सही सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद कई जानें बच सकती थीं। उनके अनुसार, आग पहली मंजिल पर लगी थी, लेकिन उसका धुआं तेजी से अन्य मंजिलों तक फैल गया। इसी कारण कर्मचारियों को अलग-अलग वार्डों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा।
SCB Hospital Fire: फायर टेंडर पहुंचने में हुई देरी
अस्पताल स्टाफ के मुताबिक, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में करीब 30 मिनट लग गए, जबकि फायर स्टेशन अस्पताल परिसर के अंदर ही मौजूद था।
इस बीच डॉक्टरों और नर्सों ने अपने स्तर पर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी थी। बाद में फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची और आग पर काबू पाया।
अलार्म और सूचना प्रणाली नहीं थी सक्रिय
एक मरीज के रिश्तेदार ने बताया कि ICU में किसी तरह का फायर प्रोटेक्शन सिस्टम मौजूद नहीं था। आग लगने के समय न तो कोई अलार्म बजा और न ही कोई पब्लिक अनाउंसमेंट हुआ।
अगर समय पर चेतावनी मिल जाती, तो हालात इतने खराब नहीं होते। कई लोगों का कहना है कि शुरुआती मिनटों में किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। जैसे ही धुआं बढ़ा, अफरा-तफरी मच गई और उसके बाद मरीजों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई।

धुएं से बिगड़ी गंभीर मरीजों की हालत
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धुआं बहुत तेजी से फैल गया था, जिससे ICU में भर्ती मरीजों की स्थिति और गंभीर हो गई।
जो मरीज पहले से ही नाजुक हालत में थे और ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर निर्भर थे, उन्हें सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने लगी। शुरुआती जानकारी में इस हादसे में करीब 10 मरीजों की मौत की बात सामने आई थी।
मौत के आंकड़ों को लेकर भी असमंजस
पोस्टमॉर्टम काउंटर के पास मौजूद एक डॉक्टर से जब मौतों की सही संख्या के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह मोटरसाइकिल पर बैठकर वहां से चले गए।
वहीं, मौके पर मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि जितनी मौतें आधिकारिक तौर पर बताई जा रही हैं, असल संख्या उससे ज्यादा हो सकती है।
SCB Hospital Fire: 2016 में भी हो चुका है ऐसा हादसा
इससे पहले साल 2016 में भुवनेश्वर के एक निजी SUM अस्पताल में भी आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें 22 मरीजों की जान चली गई थी।
उस समय के स्वास्थ्य मंत्री का अस्पताल के मालिक से करीबी संबंध होने के कारण उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। साथ ही अस्पताल के मालिक मनोज को भी हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
फिर उठ रहा वही सवाल, कौन होगा जिम्मेदार?
SCB मेडिकल कॉलेज में हुई इस घटना के बाद एक बार फिर लोगों के मन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है और इस बार सरकार किसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
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