School: दिल्ली में शीतकालीन सर्वे किया जा रहा है कि बच्चे स्कूल क्यों नहीं जाते और ऐसी कौन-सी समस्यायें हैं, जिससे वे अपनी पढ़ाई को छोड़ देते हैं; इसी सर्वे पर एक नजर डालते हैं कि किस तरह से सर्वे किया जा रहा है। यह सर्वे दिल्ली सरकार 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच कर रही है। इसकी प्रतिदिन की समय सीमा प्रातः 9 बजे से शुरू होती है और दिन के 1 बजे तक समाप्त की जाती है।
इस सर्वे में चार समूह के बच्चों को लिया गया है। पहला समूह है छह वर्ष से कम उम्र का, दूसरा 6-से 10 का , तीसरा 11 से 14 वर्ष का और चौथा समूह 15 से 19 वर्ष का है। सर्वे की टीम किस प्रकार से काम करती है ? वह टीम के कार्यक्रम के पास है। पहला कि वह समुदाय के पास जाने के लिए अपना पहचान-पत्र साथ रखती है, जिसमें आईडी कार्ड मुख्य है, ताकि लोगों से बात करने में कोई दिक्कत न आये। फिर जो रिपोर्ट वह तैयार करेगी, उसे समग्र शिक्षा अभियान के कार्यालय के पास जनवरी 15 तक जमा कर देंगे। उन बच्चों की पहचान वे करेंगे, जो स्कूल में नहीं हैं, या बच्चें जिनको विशेष सहायता की जरूरत है, उन्हें 31 जनवरी तक स्कूल में भर्ती करवा लेंगे। आखिरी रिपोर्ट, जिसमें सभी बच्चों को भर्ती कर लिया जाएगा, उस रिपोर्ट को 7 फरवरी को जमा कर दिया जाएगा।
इस काम के लिए 234 टीमें तैयार की गई हैं। जिसमें पूर्वी दिल्ली के लिए 27, दक्षिणी पूर्वी के लिए 25, दक्षिण के लिए 22, पश्चिमी बी के लिए 22, उत्तर पश्चिम ए के लिए 20, पश्चिम ए के लिए18, उत्तर के लिए16, उत्तर पूर्वी द्वितीय के लि16, उत्तर पश्चिम बी-1 के लिए15, उत्तर पूर्वी-1 के लिए 12, दक्षिण पश्चिम ए के लिए 9, दक्षिण पश्चिम बी-1 के लिए 9, उत्तर पश्चिम बी-11 के लिए 7, दक्षिण पश्चिम बी-11 के लिए 7, केंद्र के लिए 8 और नई दिल्ली के लिए 1 टीम को नियुक्त किया गया है। इस तरह से पूरी दिल्ली का सर्वे किया जा रहा है। जैसा कि बताया जा रहा है कि इस सर्वेक्षण को समग्र शिक्षा विंग, जो दिल्ली शिक्षा विभाग के अंर्तगत है, के द्वारा संचालित किया जा रहा है।
वैसे तो समग्र शिक्षा के दायत्वि के सर्वे को हर वर्ष किया जाता है, पर इससे कितना असर हो रहा है; इसकी विस्तृत जानकारी का होना आवश्यक है, तभी शिक्षा, जो नहीं ले पा रहे हैं, उनके भविष्य को बनाने का प्रयास, तब ही संभव हो पाएगा, जब पूरी टीमें सर्वे के माध्यम से असलियत को सामने ला पायेंगे- जैसे माता-पिता की कौन-सी परेशानियां हैं, जिसके कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, लेकिन एक कार्य दिल्ली सरकार ने बसों में जाने वाले नागरिकों के लिए किया है, जिसमें महिलाएं विशेष हैं, उनको एक परेशानी का सामना करना पड़ेगा, अक्सर हमने देखा है, स्कूल जानेवाली बच्ची, जो बस का किराया नहीं दे पाती थी, वह दिल्ली सरकार की चलने वाली बसों में आ-जा पाती थीं। अब वह ऐसा नहीं कर पायेंगी, उसकी वजह बच्चों के आधार कार्ड का होना जरूरी है, लेकिन बहुत सारी बच्चियां जो स्कूल जाती हैं, वह अस्थाई दिल्ली के निवासी हैं, वह बसों से किराया देकर ही जा पायेंगी, जो उनके बस की बात नहीं होगी। इसका कारण हाल ही में दिल्ली सरका ने नियम बनाया है कि वही महिलाएं या बच्चियां बस में जा सकेंगी, जिनके पास आधार कार्ड होगा, उसका ही परमिट बन पायेगा।
ऐसी स्थिति में, स्कूल न जाने वालों की संख्या बढ़ेगी, इस पर भी ध्यान देनी की जरूरत है, तकि सर्व शिक्षा अभियान में वह बच्चे न छूटें, जिनके लिए ऐसे सर्वे कराये जा रहे हैं। शिक्षा सबको मिलनी चाहिए, स्कूल भी अच्छे हों, जहां अध्यापकों की कमी न हो। छात्रों का स्वस्थ होना जरूरी है, स्वस्थ बच्चा भारत का भविष्य है। ऐसा प्रयास होना चाहिए।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल







