Scrap Business Tax Evasion: स्क्रैप और धातु कारोबार से जुड़ी फर्मों द्वारा की जा रही टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय जीएसटी (CGST) जबलपुर की एंटी-एवेशन टीम ने बुधवार से शहर के सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की, जो गुरुवार तक जारी रही। जांच में करोड़ों रुपये की हेराफेरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) इवेजन का भंडाफोड़ हुआ है।
फर्जी बिलों से टैक्स चोरी का खेल उजागर
छापेमारी के दौरान दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, माल की खरीद-बिक्री और लेखा-जोखा खंगाला गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि स्क्रैप व्यापारियों ने फर्जी बिलों के जरिए खरीद-फरोख्त दिखाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की। विभाग को 2 करोड़ रुपये से अधिक के आईटीसी इवेजन का अनुमान है।
Scrap Business Tax Evasion: केएनआर मेटल्स पर कसा शिकंजा
सीजीएसटी ने मेसर्स केएनआर मेटल्स और मेसर्स समा स्टील पर कड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान दोनों फर्मों ने कुल 20 लाख रुपये की जीएसटी राशि तत्काल जमा कराई है, जिसे विभाग ने प्रारंभिक स्वीकारोक्ति के रूप में दर्ज किया है।
आयुक्त लोकेश कुमार लिल्हारे के नेतृत्व में कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई केंद्रीय जीएसटी आयुक्तालय जबलपुर के आयुक्त लोकेश कुमार लिल्हारे के नेतृत्व में एंटी-एवेशन टीम द्वारा की गई। फर्जी बिलों के माध्यम से आईटीसी क्लेम करने के इनपुट मिलने के बाद यह सघन छापेमारी शुरू की गई।
11.84 लाख और 9 लाख रुपये किए जमा
सीजीएसटी की कार्रवाई जिन फर्मों पर की गई, उनमें शामिल हैं— मेसर्स शमा स्टील ,मेसर्स केएनआर मेटल्स, मेसर्स मनन ट्रेडर्स, मेसर्स मानस एंटरप्राइजेज,मेसर्स वर्धमान एंटरप्राइजेज, मेसर्स सिल्वर स्टील इंडस्ट्रीज ,मेसर्स महावीर इंडस्ट्रीज पर 7 फर्मों पर हुई छापेमारी। विभागीय जांच के दौरान- केएनआर मेटल्स ने 11.84 लाख रुपये और मेसर्स समा स्टील ने 9 लाख रुपये जीएसटी की राशि तत्काल जमा की है। विभाग का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक जमा है।
10 करोड़ के फर्जी बिल, 2 करोड़ का आईटीसी इवेजन
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, केएनआर मेटल्स द्वारा करीब 10 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों के जरिए लगभग 2 करोड़ रुपये के आईटीसी इवेजन का मामला सामने आया है। सभी फर्मों के प्रोपराइटरों ने संबंधित दस्तावेज शीघ्र विभाग में प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया है। सीजीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यदि अनियमितता, टैक्स चोरी या कर की कमी पाई जाती है, तो संबंधित फर्मों के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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