ख़बर का असर

Home » नई दिल्ली » नरेंद्र मोदी ने नए पीएम ऑफिस सेवा तीर्थ को किया जारी, पुराने कार्यालय में आज कैबिनेट की आखिरी सवारी

नरेंद्र मोदी ने नए पीएम ऑफिस सेवा तीर्थ को किया जारी, पुराने कार्यालय में आज कैबिनेट की आखिरी सवारी

नरेंद्र मोदी ने नए पीएम ऑफिस सेवा तीर्थ को किया जारी, पुराने कार्यालय में आज कैबिनेट की आखिरी सवारी

Seva Teerth: नई दिल्ली में सत्ता के प्रतीकात्मक और प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 1947 से रायसीना हिल स्थित South Block में संचालित हो रहा पीएमओ अब नए परिसर में शिफ्ट हो गया है।उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने परिसर में स्थापित ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। भवन की दीवार पर देवनागरी में सेवा तीर्थ अंकित है और उसके नीचे नागरिक देवो भव का मंत्र उकेरा गया है, जो शासन की प्राथमिकता को सीधे नागरिकों से जोड़ता है।

Seva Teerth: ब्रिटिश दौर की इमारत में आखिरी कैबिनेट बैठक

शाम चार बजे पुराने प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ऐतिहासिक इसलिए भी रही क्योंकि यह ब्रिटिश काल में निर्मित सेक्रेटेरिएट भवन में अंतिम कैबिनेट बैठक थी। करीब 78 वर्षों तक देश की सत्ता का संचालन यहीं से होता रहा। साउथ ब्लॉक स्वतंत्र भारत की राजनीतिक धुरी रहा है, लेकिन अब प्रशासनिक कामकाज आधुनिक सुविधाओं से लैस नए परिसर से संचालित होगा।

Seva Teerth: नए परिसर में अहम फाइलों पर हस्ताक्षर

सेवा तीर्थ में प्रवेश के बाद प्रधानमंत्री ने महिलाओं, युवाओं और समाज के वंचित वर्गों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की फाइल पर हस्ताक्षर किए गए, ताकि इलाज में देरी न हो।इसके अलावा ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य दोगुना कर छह करोड़ महिलाओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। कृषि अवसंरचना कोष की सीमा भी एक लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपये कर दी गई। वहीं 10 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को स्वीकृति दी गई।

Seva Teerth: तीन इमारतों वाला आधुनिक प्रशासनिक परिसर

नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित इस परिसर में तीन प्रमुख भवन हैं सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय कार्य करेगा। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय पहले ही शिफ्ट हो चुका है, जबकि सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय स्थापित किया गया है।करीब 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैले इस परिसर का निर्माण लगभग ₹1189 करोड़ की लागत से किया गयाहै। पहले इसे ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहा गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया।प्रधानमंत्री का नया आवास भी इसी क्षेत्र में निर्माणाधीन है। इसके पूर्ण होने के बाद वे वर्तमान निवास 7, लोक कल्याण मार्ग से नए पते पर स्थानांतरित होंगे।

कर्तव्य भवनों में मंत्रालयों का जमावड़ा

उद्घाटन के साथ ही कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया। इन भवनों में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सूचना एवं प्रसारण सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है।
इससे पहले गृह मंत्रालय रायसीना हिल्स के नॉर्थ ब्लॉक से कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट भवन में स्थानांतरित हो चुका है। लगभग नौ दशकों तक नॉर्थ ब्लॉक से संचालित होने के बाद मंत्रालयों का यह पुनर्संयोजन प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव का संकेत देता है।‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवनों का निर्माण सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत किया गया है। इसी परियोजना के अंतर्गत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ विकसित किए गए हैं। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैले इस क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता और आधारभूत संरचना दोनों मजबूत हों।

डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं

कर्तव्य भवन-1 और 2 को डिजिटल तकनीकों से लैस किया गया है। यहां केंद्रीकृत रिसेप्शन, जनसंपर्क क्षेत्र और स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम की व्यवस्था है। भवनों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।सरकार का दावा है कि इससे मंत्रालयों के बीच समन्वय बेहतर होगा और कामकाज की गति बढ़ेगी।13 फरवरी की तारीख भी प्रतीकात्मक मानी जा रही है, क्योंकि 1931 में इसी दिन नई दिल्ली को आधुनिक राजधानी के रूप में उद्घाटित किया गया था। अब लगभग एक सदी बाद, राजधानी के प्रशासनिक ढांचे में यह बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है।सत्ता का यह नया अध्याय केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन के स्वरूप और प्रतीकों में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। ‘नागरिक देवो भव’ के संदेश के साथ शुरू हुआ यह नया परिसर आने वाले वर्षों में देश के प्रशासनिक निर्णयों का प्रमुख केंद्र बनेगा।

ये भी पढ़े: लखनऊ-काशी समेत 5 कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Live Video

लाइव क्रिकट स्कोर

khabar india YouTube posterKhabar India YouTube

राशिफल