Shamli News: शामली जिले के लिसाढ़ गांव में सोमवार को आयोजित गठवाला खाप की पंचायत आंतरिक कलह और तीखी नोकझोंक के कारण चर्चा का केंद्र बन गई। खाप की एकता प्रदर्शित करने के उद्देश्य से बुलाई गई यह बैठक तब हंगामे में बदल गई जब मंच पर बोलने के अधिकार को लेकर भारतीय किसान यूनियन भाकियू टिकैत गुट से जुड़े सदस्यों और खाप आयोजकों के बीच जबरदस्त टकराव हुआ। आयोजकों ने सीधे तौर पर टिकैत गुट पर जानबूझकर हंगामा करने का आरोप लगाया है।
बोलने के अधिकार को लेकर विवाद
लिसाढ़ जनता इंटर कॉलेज में आयोजित इस पंचायत को हाल ही में सोरम गांव में हुई सर्व खाप पंचायत से अलग बुलाया गया था। गठवाला खाप के चौधरी बाबा राजेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि खाप की एकता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा खासकर यदि कोई खाप को निजी एजेंडे के तहत चलाना चाहता है। लेकिन पंचायत के बीच में ही भाकियू टिकैत गुट से जुड़े ओमपाल फुगाना विदेश मलिक, शुभम मलिक और जगबीर फौजी सहित अन्य लोगों ने मंच से संबोधित करने की मांग की। इसी मांग ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और पंचायत में जोरदार शोर-शराबा शुरू हो गया।
हस्तक्षेप से मामला शांत टिकैत गुट पर आरोप
आयोजकों का आरोप है कि ये लोग सोची-समझी रणनीति के तहत पंचायत में हंगामा करने आए थे। काफी देर तक चली नोकझोंक के बाद हरियाणा के सोनीपत से आए पंचायत अध्यक्ष बाबा बलजीत सिंह और बाबा राजेंद्र मलिक लिसाढ़ के हस्तक्षेप से ही मामला शांत हो सका अंत में यह निर्णय लिया गया कि केवल यही दो वक्ता मंच से संबोधित करेंगे। इस हंगामे के चलते सोरम पंचायत में शामिल गठवाला खाप के सदस्यों पर कोई विचार-विमर्श नहीं हो सका। हरियाणा के बाबा बलजीत सिंह ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि खाप के लिए सभी को राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर काम करना चाहिए क्योंकि खाप सर्वोपरि है।
Shamli News: कई अहम सामाजिक प्रस्ताव पारित
आंतरिक मतभेद के बावजूद पंचायत में कई महत्वपूर्ण सामाजिक प्रस्तावों पर सहमति बनी। इनमें खाप की एकता को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई सोशल मीडिया पर अनुशासनहीन बयानों पर रोक युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और स्थायी विवाद समाधान समिति का गठन शामिल था। इसके अलावा दहेज नशाखोरी और बेटियों से भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाने जरूरतमंद कन्याओं के विवाह खिलाड़ियों के सहयोग और खाप क्षेत्र में उद्योग व विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी काम करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
गठवाला खाप से जुड़े राजेंद्र मलिक और कालिंदर मलिक ने पहले ही सोरम पंचायत का बहिष्कार किया था और यह स्पष्ट कर दिया था कि सोरम पंचायत में शामिल होने वालों के खिलाफ लिसाढ़ में फैसला लिया जाएगा हालांकि हंगामे के कारण यह फैसला टल गया।
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