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शिवाजी महाराज जयंती: पीएम मोदी ने कहा आराध्य देव, अमित शाह ने बताया स्वराज की प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी। दोनों नेताओं ने उनके स्वराज, शौर्य, सुशासन और राष्ट्रभक्ति को आज के भारत के लिए प्रेरणा बताया।
शिवाजी महाराज जयंती

Shivaji Jayanti: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक राजा या ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि वे देशवासियों के लिए आराध्य देव के समान हैं।

दूरदर्शी नेतृत्व और स्वराज की प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इस अवसर पर हम एक दूरदर्शी नेता, कुशल प्रशासक और महान रणनीतिकार को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज स्वराज के प्रबल समर्थक थे। उनका साहस हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा। उनका अच्छा शासन हमारे लिए मार्गदर्शन का काम करेगा और न्याय व स्वाभिमान की उनकी भावना समाज को और मजबूत बनाएगी।

अपने एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक नाम नहीं हैं। वे केवल राजा-महाराजा नहीं थे, बल्कि हमारे लिए पूजनीय हैं। उनका व्यक्तित्व असाधारण था। उन्होंने स्वराज की स्थापना की और अच्छे शासन यानी सुराज को भी साकार किया। वे अपने पराक्रम और प्रभावी प्रशासन के लिए प्रसिद्ध हैं।

Shivaji Jayanti: जनकल्याण और सुरक्षा सर्वोपरि संकल्प

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व के कई पहलू हैं, जो हर किसी को किसी न किसी रूप में प्रेरित करते हैं। उन्होंने देश की सामूहिक शक्ति को पहचाना और नौसेना को मजबूत किया। उनका प्रबंधन कौशल आज भी लोगों को प्रेरणा देता है। उनकी वीरता, विचारधारा और न्यायप्रियता ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है। उनकी बहादुरी, सैन्य कौशल और संतुलित राजनीतिक व्यवस्था आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा कि शिवाजी महाराज ने हमेशा जनता के हित को सबसे ऊपर रखा और उनकी सुरक्षा के लिए खुद को समर्पित कर दिया। यही कारण है कि उनका जीवन आज भी पूरे देश के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।

धर्मनिष्ठ और निष्पक्ष शासन का संदेश

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषित भी साझा किया: “गोपायितारं दातारं धर्मनित्यमतन्द्रितम्। अकामद्वेषसंयुक्तमनुरज्यन्ति मानवाः।”
इसका अर्थ है कि लोग उसी शासक से प्रेम करते हैं, जो उनकी रक्षा को अपना कर्तव्य समझे, लोककल्याण में लगा रहे, धर्म और न्याय का पालन करे, हमेशा सजग रहे और बिना किसी लालच या द्वेष के निष्पक्ष भाव से शासन चलाए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शिवाजी महाराज को उनकी जयंती पर याद किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर एक बड़ी और मजबूत सेना बनाई, जिसका उद्देश्य राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा करना था। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और अनोखी रणनीति इतिहास में बहुत कम देखने को मिलती है।

हिंदवी स्वराज का अटूट संकल्प

अमित शाह ने ‘एक्स’ पर लिखा कि कम उम्र में ही हिंदवी स्वराज का संकल्प लेने वाले शिवाजी महाराज ने जीवन भर धर्म की रक्षा का प्रण निभाया। उन्होंने देश के हर हिस्से में स्वधर्म, स्वराज और स्वभाषा के लिए जीने और मरने की भावना जगाई। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को संगठित कर ऐसी सेना बनाई, जो राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित थी। उनकी जैसी इच्छाशक्ति और रणनीति बहुत दुर्लभ है। उन्होंने जयंती पर उन्हें नमन किया।

Shivaji Jayanti: संकल्प से बदला राष्ट्र का इतिहास

अमित शाह ने अपने एक भाषण का हिस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का अर्थ है संकल्प, शौर्य, समर्पण और बलिदान। उन्होंने पूरे देश में स्वधर्म, स्वराज और स्वभाषा के लिए एक नई चेतना पैदा की। उस समय महाराष्ट्र चारों ओर से मुगल, अधीन और निजाम शासन से घिरा हुआ था, लेकिन कुछ ही वर्षों में वह हिंदवी स्वराज में बदल गया। बाद में स्वराज का विचार अटक से कटक, बंगाल, तमिलनाडु और गुजरात सहित पूरे देश में फैलता दिखाई दिया।

Shivaji Jayanti: शिवाजी महाराज जयंती
शिवाजी महाराज जयंती
12 वर्ष में स्वराज का संकल्प

उन्होंने कहा कि जब शिवाजी महाराज का जन्म हुआ, तब देश कठिन परिस्थितियों में था। लोगों के मन में स्वराज की कल्पना भी मुश्किल थी। ऐसे समय में मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने संकल्प लिया कि वे सिंधु से कन्याकुमारी तक भगवा ध्वज फहराएंगे। अमित शाह ने कहा कि उन्होंने दुनिया के कई महान नेताओं के जीवन पढ़े हैं, लेकिन ऐसी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और रणनीति, साथ ही समाज के हर वर्ग को जोड़कर अपराजेय सेना बनाने का कार्य शिवाजी महाराज जैसा किसी ने नहीं किया।

साहस से टूटी मुगल सत्ता

उन्होंने यह भी कहा कि एक बालक ने अपने साहस और संकल्प से पूरे देश को स्वराज का संदेश दिया और करीब 200 साल से चल रहे मुगल शासन को तोड़कर स्वतंत्रता की राह दिखाई। जब शिवाजी महाराज की सेना देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंची, तब लोगों को लगा कि उनका धर्म, भाषा और संस्कृति सुरक्षित है।

Shivaji Jayanti: 100 साल में विश्व में प्रथम भारत

अमित शाह ने कहा कि आज आजादी के 75 साल बाद भारत दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। हम यह संकल्प लेते हैं कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे, तब हमारा देश दुनिया में प्रथम स्थान पर होगा। उन्होंने कहा कि इस सोच की नींव शिवाजी महाराज ने रखी थी। उनका अंतिम संदेश था कि स्वराज की लड़ाई कभी नहीं रुकनी चाहिए और स्वधर्म व स्वभाषा के सम्मान की रक्षा जारी रहनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह कार्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सबका कर्तव्य है कि शिवाजी महाराज के जीवन और चरित्र को हर बच्चे तक पहुंचाया जाए।

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