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माघ मेले में शंकराचार्य की पालकी रोकने पर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य की पालकी रोके जाने और शिष्यों से कथित मारपीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई है।
Supreme Court

Supreme Court: प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई। याचिका में मौनी अमावस्या (18 जनवरी) की घटना को आधार बनाकर संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन बताया गया है।

पालकी रोकी और शिष्यों के साथ मारपीट

याचिका में कहा गया है कि मौनी अमावस्या के राजसी स्नान के दौरान पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी रोक दी और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और अपमानजनक व्यवहार किया। वीडियो फुटेज में शिष्यों को घसीटते और बल प्रयोग करते हुए देखा गया। इस कार्रवाई ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

Supreme Court: एसओपी की मांग

अधिवक्ता उज्ज्वल गौर ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि माघ मेले या किसी अन्य धार्मिक आयोजन में शंकराचार्य, धर्माचार्य और संतों के लिए एक स्थायी एसओपी बनाई जाए। इसमें राजसी स्नान, पालकी प्रवेश और सुरक्षा का प्रावधान होना चाहिए। साथ ही, सरकारी ज्यादतियों की शिकायत के लिए प्रभावी तंत्र भी स्थापित किया जाए।

धरना, अनशन और विवाद

मौनी अमावस्या पर बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन के नाम पर रोक लगाने के बाद शिष्यों ने विरोध किया। शंकराचार्य ने इसे अपमान बताते हुए 10-11 दिनों तक धरना और अनशन किया और अंततः बिना स्नान किए 28 जनवरी को मेला छोड़कर वाराणसी लौट गए। उन्होंने योगी सरकार पर ‘नकली हिंदू’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

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