Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने 26 फरवरी 2026 को कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन के ईशा योग केंद्र में बनाए गए आधुनिक गैसीफायर श्मशान घाटों से जुड़े मामले में सुनवाई की। इस दौरान, न्यायालय ने ईशा द्वारा संचालित श्मशान घाटों की सराहना करते हुए इसे ‘पवित्र कार्य’ बताया और विवाद के समाधान के लिए आपसी सहमति की सलाह दी।
न्यायालय ने ईशा फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की
सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने गैसीफायर श्मशान घाटों को समाज के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास कोई ठोस कानूनी आधार नहीं था और मद्रास उच्च न्यायालय ने पहले ही याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने ईशा फाउंडेशन के श्मशान घाटों को पवित्र कार्य मानते हुए संबंधित पक्षों से आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की सलाह दी।
Supreme Court: पक्षों को बातचीत की सलाह
अदालत ने इस मामले के समाधान के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्रन को मध्यस्थ नियुक्त किया। इसके अलावा, दोनों पक्षों को जमीन के मुद्दे पर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की सलाह दी।
ईशा फाउंडेशन का समाज सेवा में योगदान
ईशा फाउंडेशन 2010 से तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में श्मशान घाटों का संचालन और रखरखाव कर रहा है। वर्तमान में, यह संस्था लगभग 30 श्मशान घाटों की देखभाल कर रही है, जिसमें हरित वातावरण, स्वच्छ सुविधाएं और पर्यावरण के अनुकूल ढांचा उपलब्ध है।






