Trump’s ultimatum: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अगले 10 से 15 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान को नई न्यूक्लियर डील के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से की जा सकती है।
लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक पर विचार
ट्रंप प्रशासन ईरान पर सीमित सैन्य हमला करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस संभावित स्ट्राइक का मकसद बड़े युद्ध से बचते हुए तेहरान पर दबाव बनाना बताया जा रहा है, ताकि वह अमेरिकी शर्तों के तहत न्यूक्लियर समझौते को स्वीकार करे।
Trump’s ultimatum: शुरुआती हमलों के बाद बढ़ सकता है अभियान
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि शुरुआती हमले को मंजूरी मिलती है, तो ईरान के कुछ अहम सैन्य या सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। अगर ईरान ने न्यूक्लियर एनरिचमेंट रोकने से इनकार किया, तो अमेरिका अपने सैन्य अभियान का दायरा बढ़ा सकता है।
ट्रंप बोले “डील होगी, किसी न किसी तरह”
ट्रंप ने एक कार्यक्रम में कहा, “हम डील करेंगे या किसी न किसी तरह डील करेंगे।” एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले 10 दिनों में स्थिति साफ हो सकती है, जिसे बाद में बढ़ाकर 10–15 दिन बताया गया।
Trump’s ultimatum: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य हलचल तेज
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके साथ वॉरशिप्स क्षेत्र के करीब पहुंच रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मार्च के मध्य तक अमेरिकी सेना पूरी तरह तैनात हो सकती है।
ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबोने में सक्षम है और किसी भी हमले का जोरदार जवाब दिया जाएगा।
Trump’s ultimatum: कूटनीतिक बातचीत जारी
तनाव के बीच व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि कूटनीतिक बातचीत अभी खत्म नहीं हुई है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच कुछ प्रगति हुई है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं। ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, लेकिन उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है।
पृष्ठभूमि में पुराना विवाद
गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका 2015 के न्यूक्लियर समझौते से बाहर निकल गया था। इसके बाद से प्रतिबंधों और सैन्य तनाव के कारण मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष का खतरा लगातार बना हुआ है।
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